बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा देने में भारत नामीबिया, वियतनाम और बोत्सवाना जैसे छोटे देशों से भी काफी पीछे है। वहीं इस मामले में बांग्लादेश और नेपाल जैसे पिछड़े देश भारत के मुकाबले बहुत कम अंतर से पीछे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की हालिया रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
डब्ल्यूएचओ ने भारत के सामाजिक ढांचे को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की हैं। संगठन ने कहा है कि देश की 93 फीसदी श्रमशक्ति असंगठित है। इन श्रमिकों के काम और आय की कोई सुरक्षा नहीं है। कर्मचारियों की नौकरी के लिए कोई वैधानिक सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 65 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति को हर महीने सिर्फ चार डॉलर यानी करीब 250 रुपये ही पेंशन के रूप में मिलते हैं। जबकि नामीबिया में बुजुर्गों को पेंशन 28 डॉलर, बोत्सवाना में 27 और वियतनाम में छह डॉलर है।
नेपाल, बांग्लादेश से आगे भारत, पर मॉरीशस, चिली, दक्षिण अफ्रीका से पीछे
नेपाल और बांग्लादेश में यह पेंशन दो डॉलर है। भारत में 60 से अधिक उम्र के
व्यक्तियों में से 13 फीसदी लोग ही पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। जबकि
नामीबिया में 87 और बोत्सवाना में 85 फीसदी बुजुर्गों को पेंशन का लाभ मिल
रहा है।
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कई कम और मध्यम आय वर्ग के
देशों के मुकाबले भारत बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा देने में काफी पिछड़ा
है। दक्षिण अफ्रीका, चिली, अर्जेंटीना, ब्राजील, मॉरीशस, लिसोथो, थाईलैंड
और उरुग्वे जैसे देश भी इस मामले में भारत से काफी आगे हैं।
विश्व
स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक निर्धारक तत्वों को लेकर
गठित आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि देश की 38 करोड़ की श्रम शक्ति को
जीवन, स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ जैसी सभी सुविधाएं
मुहैया कर भी दी जाती हैं, तो इसमें भारत की कुल जीडीपी का सिर्फ 0.5 फीसदी
खर्च होगा।