सुश्रुत ट्रामा सेंटर की ऑक्सीजन यूनिट दो सप्ताह से एक ही कर्मचारी के भरोसे चल रही थी। ड्यूटी पर कभी हेल्पर होता था तो कभी टेक्नीशियन। नियमानुसार एक टेक्नीशियन और एक हेल्पर को हमेशा ड्यूटी पर तैनात होना चाहिए। वहीं, यूनिट के कामकाज का जिम्मा संभाल रही कंपनी का कहना है कि एक वर्ष पहले ही अस्पताल से अनुबंध समाप्त हो चुका था।
मंगलवार की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से पांच डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने जांच रिपोर्ट में पाया है कि दो सप्ताह से ऑक्सीजन यूनिट में एक ही कर्मचारी तैनात था। रिपोर्ट में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी, उसके टेक्नीशियन, हेल्पर और उनके काम करने के तरीके को पूरी तरह से जिम्मेदार बताया गया है।
घटना के समय महज एक ही सिलेंडर से सप्लाई हो रही थी। जबकि कई सिलेंडर भरे हुए थे। वहीं, उस रात ड्यूटी पर तैनात हेल्पर अमित ने जांच दल को बताया कि ऑक्सीजन का प्रेशर 47 (सामान्य के करीब) था। जांच टीम ने घटना के समय ड्यूटी पर तैनात डॉ. भाना सिंह, डॉ. थुंगबेनी, डॉ. अजित कुमार और नर्सिंग स्टाफ गीता गोयल, रामा लाल, रीना के अलावा टेक्नीशियन मान सिंह व अशोक सरीन से भी पूछताछ की।
अस्पताल की आंतरिक जांच रिपोर्ट
रिपोर्ट में स्पष्ट रुप से कहा गया है कि ऑक्सीजन प्रेशर की कमी से आईसीयू में भर्ती मरीजों की जान गई। सोमवार की रात करीब दो बजे ऑक्सीजन का प्रेशर कम हुआ। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात डॉ. थुंगबेनी ने गैस प्लांट में फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद डॉक्टर स्वयं गैस प्लांट पहुंचे। कुछ देर के बाद स्थिति सामान्य हो पाई।
एम्स में भी ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी
सुश्रुत ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष-1998 से सुश्रुत ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन सप्लाई का काम किया जा रहा है। इसके अलावा एम्स और एम्स ट्रामा सेंटर में भी ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ट्रामा सेंटर में दिनभर चलती रही जांच
ऑक्सीजन बाधित होने से पांच लोगों की मौत के मामले में सरकारी जांच दल और पुलिस बुधवार को पूरे दिन अस्पताल में जांच-पड़ताल में जुटी रही। स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच दल ने लगभग चार घंटे सुश्रुत ट्रामा सेंटर में बिताए।
विशेष सचिव की अगुवाई में टीम के सदस्यों ने सबसे पहले ट्रामा सेंटर के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास रामपाल से जानकारी ली। इसके बाद बारी-बारी से सोमवार की रात ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों, स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन व अन्य कर्मियों से पूछताछ की।
आईसीयू में तैनात डॉक्टरों से काफी देर तक बातचीत की गई। एक बार बातचीत करने के बाद डॉक्टरों को भेज दिया गया, लेकिन कुछ देर बाद दुबारा आईसीयू में तैनात डॉक्टर को बुलाया गया।
ड्यूटी पर तैनात अमित को लेकर पहुंची पुलिस
सोमवार की रात ऑक्सीजन यूनिट में ड्यूटी पर तैनात अमित को लेकर पुलिस ट्रामा सेंटर पहुंची। पुलिस के साथ चिकित्सक भी मौजूद थे। पुलिस और डॉ. उससे सवाल जवाब करते रहे। अमित जांच दल को समझाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उनके सवालों से कई बार असहज भी हो रहा था।
अमित से बार-बार पूछा गया कि सोमवार की रात कौन सा सिलेंडर चल रहा था और कौन सा बंद था? कैसे ऑक्सीजन यूनिट काम करता है? एक सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है तो दूसरा कैसे लगाते हो? ऑक्सीजन सप्लाई कैसे बंद हो गई? अमित ने कहा सप्लाई बंद नहीं हुई थी।
जांच-पड़ताल के दौरान बुधवार दोपहर टेक्नीशियन भी मौजूद था, लेकिन अमित से जब सवाल किया जा रहा था उसे चुप रहने की हिदायत दी गई थी। बाद में टेक्नीशियन से भी कई सवाल पूछे गए।
परिजनों को दो-दो लाख मुआवजा
नई दिल्ली। सुश्रुत ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत के मामले में दिल्ली सरकार ने निकट संबंधियों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने उक्त राशि देने की घोषणा की है।