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जानिए, केजरीवाल को डीएलएफ के खिलाफ कौन दे रहा है सबूत

Thu, 11 Oct 2012 01:50 AM IST
गुड़गांव/प्रवीण कुमार
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डीएलएफ के जरिए राबर्ट वाड्रा पर हमला करने वाले इंडिया अंगेस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल को इस मामले में गुड़गांव से मदद मिल रही है। इसके सहारे केजरीवाल के दावे और मजबूत होते दिख रहे हैं। इस प्रकरण से जुड़े तथ्य इकट्ठा करने को उन्होंने अपने तमाम घोड़े दौड़ा दिए हैं। इसी का परिणाम है कि मंगलवार को उन्होंने इस मामले में हरियाणा सरकार को डीएलएफ के बहाने लपेटने की कोशिश की। इस कोशिश को अमलीजामा पहना रहे हैं मानेसर के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश यादव। मंगलवार को वह दिल्ली में पत्रकार वार्ता में अरविंद एंड टीम के साथ मंच पर मौजूद थे।
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टीम केजरीवाल के मददगार बने ओमप्रकाश ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि उन्हें एक ऐसे मंच की तलाश थी, जो सच्चाई को उजागर कर सके। अरविंद एंड टीम के रूप में वह मंच मिल गया है। उन्होंने कहा कि टीम को भी उनके जैसे लोगों की जरूरत है। दोनों एक-दूसरे की सहायता करेंगे तो डीएलएफ की सच्चाई सामने आ जाएगी। ओमप्रकाश के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में हुई प्रेसवार्ता सोमवार यानी आठ अक्टूबर को होनी थी। किन्हीं कारणों से यह रद्द करनी पड़ी।

उन्होंने बताया कि केजरीवाल की ओर से उन्हें सबूतों के साथ बुलाया गया था। उनके बुलावे पर ही सबूतों के साथ वार्ता में पहुंचा था। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से मानेसर जमीन खरीद के तमाम सबूत दिए गए हैं। गुड़गांव के बाकी हिस्सों में हुई जमीन खरीद के सबूत दूसरे पीड़ितों की ओर से मुहैया कराए गए हैं। केजरीवाल एक विशेष टीम गठित कर सबूत जुटाने का कार्य कर रहे हैं।
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हमारी जमीन, उनकी स्कीम
ओमप्रकाश ने आरोप लगाया कि एचएसआईआईडीसी ने 10 एकड़ जमीन में अपने कर्मचारियों के लिए हाउसिंग सोसायटी बनाई। इनमें 580 फ्लैट बनाए गए। इस सोसायटी में एजेंसी का कोई कर्मचारी नहीं रहता है, जबकि ग्रामीणों के लिए भी कुछ नहीं किया। आज ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण कर गांवों और ढाणियों में उनकी जल निकासी की जा रही है। इससे गांवों की सूरत बिगड़ रही है।

कौन हैं ओमप्रकाश
ओमप्रकाश मानेसर गांव के पूर्व सरपंच, ब्लॉक समिति चेयरमैन और पार्षद रह चुके हैं। वर्ष 1991-95 तक वह सरपंच रहे। उसके बाद ब्लॉक समिति के चेयरमैन बने। वर्ष 2000-05 तक गुड़गांव के वार्ड पांच से पार्षद रहे। क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों में आज भी उनकी प्रमुख हिस्सेदारी होती है। मानेसर के मारुति प्लांट के विवाद में भी उन्हाेंने कंपनी का खुलकर साथ दिया था। ओमप्रकाश ने कहा कि दक्षिण हरियाणा को आज तक उसके हिस्से का हक नहीं मिला है। उसके लिए वह संघर्षरत हैं। उन्हें स्थानीय कांग्रेस सांसद का नजदीकी माना जाता है।

राजनेताओं में नाराजगी
किसानों को जमीन अधिग्रहण का डर दिखाकर प्राइवेट बिल्डर्स को बेचने के मामले में राजनीतिज्ञ भी खासे नाराज हैं। इनका आरोप है कि गुड़गांव का सौदा किया जा रहा है। यही हाल रहा तो यहां ग्रीन बेल्ट देखना नसीब नहीं होगा। पेश है इस पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने हमेशा ही गुड़गांव में लूट मचाई है। इसको सोमनाथ का मंदिर समझ रखा है। मुख्यमंत्री ने सभी हदें पार कर दी हैं। मास्टर प्लान में तीन बार फेरबदल करने में भी हुड्डा की मानसिकता झलक रही है। आने वाले दिनों में गुड़गांव में ग्रीन बेल्ट भी देखने को नहीं मिलेगी। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
-अनिल राव, गुड़गांव इनेलो अध्यक्ष

इनेलो के प्रधान महासचिव अजय चौटाला ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होेने से पूर्व ही चेताया था। वजीराबाद से लेकर, सिलोखरा, मानेसर, गाडौली, गढ़ी, खांडसा की जमीन का अधिग्रहण एसईजेड और दूसरी सुविधाओं के लिए किया गया था। जमीन की दलाली को बड़ी सफाई से अंजाम दिया गया।
-ब्रह्म डागर, वरिष्ठ इनेलो नेता

अगर यह कहा जाए कि कांग्रेस की हुड्डा सरकार ने गुड़गांव में देश का सबसे बड़ा जमीनी घोटाला किया है तो गलत नहीं होगा। हॉस्पिटल के लिए जमीन का अधिग्रहण फिर उसे रिलीज कर प्राइवेट बिल्डर को बेचना, यहीं से खेल शुरू हो गया था। भोले-भाले किसान सरकार की इस मंशा को समझ ही नहीं पाए।
-राव नरबीर सिंह, पूर्व मंत्री एवं बीजेपी नेता

मुख्यमंत्री जनता के हितों को भूलकर प्राइवेट बिल्डरों के हितों को साध रहे हैं। खासकर दक्षिण हरियाणा के किसानों के साथ हर कदम पर छल किया जा रहा है। मामला गुड़गांव का हो, रेवाड़ी का, मेवात का या दूसरे स्थानों का। यहां के किसान मुख्यमंत्री के छल का शिकार हुए हैं।
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-कमल यादव, जिला महामंत्री बीजेपी
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