बसपा सुप्रीमो मायावती ने सस्पेंस बरकरार रखते हुए फिलहाल यूपीए सरकार को समर्थन जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने केंद्र की नीतियों को जनविरोधी करार देकर पार्टी कार्यकर्ताओं से देश भर में आंदोलन चलाने कहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव अभी हो या बाद में, बसपा पूरी तरह तैयार है। लोकसभा चुनाव में बसपा इस दफा ‘बैलेंसिंग पॉवर’ बनकर उभरेगी।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मायावती ने कहा कि बसपा कार्यकारिणी व संसदीय दल ने समर्थन वापसी के मुद्दे का फैसला लेने का काम उन पर छोड़ दिया है। वह बसपा मूवमेंट के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इस पर निर्णय लेंगी। लखनऊ रैली से उपजे आत्मविश्वास के बाद जोश में आईं मायावती ने कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव के लिए तैयार रहने और यूपीए की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाने कहा।
उन्होंने आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीमकोर्ट के ताजा फैसले से जुड़े सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। मायावती से जब यह पूछा गया कि समर्थन वापसी पर फैसला अभी क्यों नहीं, इस पर उन्होंने कहा कि वह सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर बहुत जल्द फै सला लेंगी। मायावती ने कहा कि पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने काफी गहन चर्चा के बाद तय किया गया कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी उन पर (मायावती) छोड़ दी जाए। अब मायावती के ताजा रुख से साफ हो गया कि वह समर्थन वापसी के सवाल पर नरमी बरतने के मूड में हैं।
मायावती ने कहा कि बसपा ने यूपीए सरकार को सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर करने व दलितों, गरीबों व अल्पसंख्यकों के हितों का ख्याल रखने के लिए समर्थन दिया था, लेकिन दुख की बात है कि आज भी जनता महंगाई व भ्रष्टाचार से परेशान है। केंद्र की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बसपा पूरे देश में पर्दाफाश अभियान चलाएगी। जनता को जागरूक कर केंद्र पर दबाव बनाया जाएगा कि वह जनविरोधी नीतियां वापस ले।
बसपा बनेगी बैलेंसिंग पॉवर
मायावती ने रैली में कहा था कि केंद्र सरकार की अस्थिरता को देखते हुए लगता है कि लोकसभा चुनाव समय से पहले हो सकते हैं। पार्टी को युद्धस्तर पर चुनाव की तैयारियों में लगना है। रैली में जनता का जबरदस्त उत्साह देखते हुए पार्टी को यकीन हो गया है कि लोकसभा चुनाव चाहे हाल ही में क्यों न हों, बसपा बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी। पार्टी इन चुनावों में बैलेंसिंग पावर बन उभरेगी।
समर्थन वापस लेना ही नहीं थामायावती को यूपीए सरकार से समर्थन वापस का फैसला लेना ही नहीं था। यह तो सबको पता था कि वह समर्थन वापस लेने वाली नहीं हैं। - रामगोपाल यादव, राष्ट्रीय महासचिव, समाजवादी पार्टी