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सांसद बोले, "गंगा को कौन और क्यों लाया?"

Fri, 20 Mar 2015 03:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा में गुरुवार को उस समय दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब भाजपा सांसद ने गंगा नदी की उत्पत्ति और इसमें स्नान करने के लाभ के बारे में सवाल किया।
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उनका सवाल सुनकर न केवल स्पीकर बल्कि सदन के कई सदस्य भी हैरान रह गए। प्रश्नकाल के दौरान जल संसाधन एवं नदी विकास राज्य मंत्री सांवरलाल जाट पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।

तभी भाजपा के पीपी चौहान ने सवाल किया, गंगा को कौन लाया था, इसे क्यों लाया गया था? इसमें स्नान करने से क्या प्रभाव पड़ता है?’ उनका सवाल सुनकर जहां कई सांसद मुस्कुरा रहे थे तो कई उन्हें हैरानी से देख रहे थे।
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स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी कहा, ‘यह क्या है? क्या यह सवाल है?’ हालांकि केंद्रीय मंत्री ने उनके सवाल का जवाब दिया, यह ऐतिहासिक मामला है। यह सर्वविदित है कि और भगीरथ गंगा को लोगों के कल्याण के लिए लाए थे। इस नदी की पूजा होती है।
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‘मैं दोनों के हाथ में लठ लाकर दे दूं क्या?’

पश्चिम बंगाल में एक नन से बलात्कार के बाद राज्य में कथित रूप से एक साध्वी के साथ भी ऐसी ही घटना सामने आई है। लोकसभा में बृहस्पतिवार को जब यह मुद्दा उठाया गया तो भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों में बहस इस कदर बढ़ गई कि अध्यक्ष सुमित्रा महाजन कहना पड़ा कि क्या वह दोनों के हाथों में लठ लाकर दे दें। महाजन ने कहा कि इन मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

शून्यकाल में भाजपा के एसएस आहलुवालिया ने कहा कि पश्चिम. बंगाल में 71 वर्षीय नन के साथ बलात्कार की घटना का शोर ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब बर्दवान में 75 वर्षीय एक साध्वी के साथ बलात्कार और हत्या की वारदात हुई है।

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद राज्य की महिला मुख्यमंत्री को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इस पर तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कड़ा प्रतिवाद करते हुए दावा किया कि यह बलात्कार का नहीं, हत्या का मामला है।

आहलुवालिया और बनर्जी के बीच तकरार देर तक चली और दोनों हाथ उठा-उठा कर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। बार-बार शांत रहने की अपील का असर न होते देख स्पीकर महाजन ने कहा, ‘मैं दोनों के हाथ में लठ लाकर दे दूं क्या? यह क्या हो रहा है? लड़ना है तो बाहर जाकर लड़ो।

..यह अच्छा नहीं है, दोनों सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं। ..अब तो हद हो गई है, यह सदन इसके लिए नहीं बना है।’ स्पीकर ने यह भी कहा कि इस मामले में एक-दूसरे पर लाछंन लगाना ठीक नहीं है और राजनीति न की जाए। अध्यक्ष की फटकार के बाद आहलुवालिया और बनर्जी शांत हुए।
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