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'जब नक्सली हमला हुआ, मैं अमेरिका में था'

Thu, 30 May 2013 10:42 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
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नक्सली हमले के 5 दिन बाद मीडिया के सामने आए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि नक्सली हमले के वक्त वे अमेरिका में थे।
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हालांकि सुशील कुमार शिंदे ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं सहित 29 लोगों की निर्मम हत्या करने वाले नक्सलियों को आतंकी कहा जाए या नहीं, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने इस बर्बर हत्याकांड के बाद नक्सलियों को आतंकी करार दे दिया है।

बृहस्पतिवार को करीब दस दिन बाद अमेरिका की यात्रा से लौटे शिंदे ने कहा कि नक्सलियों को आतंकी की संज्ञा देने के बारे में वह फिलहाल कुछ नहीं बोलना चाहते। इतना ही नहीं शिंदे हर उस सवाल का गोलमोल जवाब देते रहे जो उनकी नजर में विवादास्पद थे।
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बहरहाल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, गृह सचिव और आईबी निदेशक के दौरे के बाद शिंदे भी शुक्रवार को हालात का जायजा लेने छत्तीसगढ़ जाएंगे।

नक्सल प्रभावित इलाकों में सैन्य कार्रवाई और ग्रामीण विकास का काम गृह मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयोजन से चल रहा है। नक्सलियों के साथ बातचीत की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा कि उधर से वार्ता की कोई पेशकश नहीं है तो फिर बात किससे की जाएगी।

इससे पहले मौजूदा वित्त मंत्री पी. चिदंबरम गृह मंत्री थे। तब उन्होंने सरकार की पॉलिसी साफ कर दी थी कि नक्सली जब तक बंदूक नहीं रखेंगे बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं होगी, लेकिन शिंदे ने सिर्फ इतना कहा कि बातचीत की प्रस्ताव नक्सलियों की ओर से आना चाहिए।

अमेरिका से लौटने के बाद बुलाए गए प्रेस कांफ्रेंस में शिंदे ने माना कि नक्सलियों का अगला बड़ा निशाना बड़े शहर हो सकते हैं।

इस घटना के पीछे राजनीतिक साजिश के सवाल को टालते हुए शिंदे ने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर हमले की जांच हर पहलू के की जा रही है। राज्य सरकार अपनी ओर से न्यायिक जांच करवा रही है।

एनआईए भी तहकीकात में जुटी है। शिंदे के मुताबिक अगर इस घटना के पीछे कोई राजनीतिक साजिश होगी तो जांच में सामने आ जाएगी।

आंख के इलाज को अमेरिका में रुके थे शिंदे
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं पर नक्सली हमले के बाद देश में अपनी गैर मौजूदगी पर सफाई दी है।

वे आंतरिक सुरक्षा पर अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी से साथ बातचीत करने के सरकारी कार्यक्रम के तहत पिछले 19 तारीख से अमेरिका में थे।

शिंदे ने कहा कि 29 मई तक उनका अमेरिका में रहने का कार्यक्रम पहले से तय था। अमेरिका से लौटते ही बुलाए गए प्रेस कांफ्रेंस में शिंदे ने कहा कि वहां वह आंख के इलाज के लिए रुके हुए थे।

शिंदे ने पूछे जा रहे सवाल पर हल्की सी नाराजगी दिखाते हुए कहा कि अमेरिकी में रुकने के कारण उन्हें आरोपी या भगोड़ा नहीं समझा जाना चाहिए। वहां उनके रुकने की ठोस वजह थी।

गौरतलब है कि यह बातचीत 23 मई को ही खत्म हो गई थी और शिंदे के साथ गए मंत्रालय के उच्चअधिकारी उसी दिन भारत के लिए रवाना हो गए थे। राजनीतिक लोगों पर नक्सली हमले के बाद भी शिंदे के अमेरिका में रुके रहने पर काफी सवाल खड़े होने लगे थे।

शिंदे ने कहा कि उन्हें वाशिंगटन में विश्व प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर ब्रेसलर से आंखें चेक करानी थी। यह कार्यक्रम पहले से तय था। यही वजह है कि उन्हें अमेरिका में रुकना पड़ा।
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शिंदे के मुताबिक वह फोन से लगातार संपर्क में थे। शिंदे ने कहा कि फोन पर ही उन्होंने घटना की जांच एनआईएस के कराने के फैसले को हरी झंडी दी थी। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से भी फोन पर लंबी बातचीत की थी।
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