राज्यसभा में बुधवार को ‘बकवास’ शब्द को लेकर जमकर बहस छिड़ गई। सरकार के मंत्रियों और विपक्ष के बीच इस पर तीखी नोंक झोंक तक की नौबत आ गई। ‘बकवास’ शब्द संसदीय है या असंसदीय, यह मसला वाद विवाद का विषय बन गया।
पक्ष-विपक्ष की बहस के बाद सभा पीठ की ओर इसे असंसदीय शब्द ठहराया गया और सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया। दरअसल, ये विवाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के बयान से शुरू हुआ।
काले धन से संबंधित विधेयक को लेकर उन्होंने केंद्र और भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस सरकार ने काले धन पर बड़े-बड़े वायदे और जुमले दिए। मगर हकीकत में कुछ नहीं किया। इसलिए भाजपा को बकवास जुमला पार्टी कहना ही ठीक होगा।
उन्होंने इस शब्द का कई बार इस्तेमाल किया। उस समय भाजपा की तरफ से किसी ने विरोध नहीं किया। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मेजें थपथपा कर ब्रायन का हौसला बढ़ाया। मगर उनके बोलने के बाद ही वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि माननीय सदस्य कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं और वे संसद के नियम कानून ही भूल गए।