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संजय दत्त ने हथियार रखने के अलावा किए थे और भी गुनाह?

Sat, 23 Mar 2013 01:17 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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1993 के मुंबई ब्लास्ट केस में षड्यंत्रकारियों से हथियार हासिल करने और अवैध ढंग से अपने पास रखने के जुर्म में सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को पांच साल कैद की सजा सुनाई। लेकिन क्या संजय दत्त का बस इतना ही गुनाह था कि उसने आत्मरक्षा के लिए हथियार रखा था?
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक मुंबई धमाकों के साजिशकर्ताओं के दिमाग में दो एजेंडे थे। पहला कि वे लोग मुंबई (बंबई) को आरडीएक्स के धमाकों से दहलाना चाहते थे। वहीं दूसरा अपने संप्रदाय के कुछ खास लोगों को हथियार देना था जिससे वे सांप्रदायिक दंगे की आग को भड़काकर शहर को तबाह किया जा सके।

पाकिस्तान में दी गई हथियारों की ट्रेनिंग
साजिशकर्ताओं ने खास योजना के तहत पाकिस्तान से रायफल्स, पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक मंगाए थे। कुछ खास लोगों को पाकिस्तान में हथियारों की ट्रेनिंग दी गई थी।
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टाडा अदालत में आरोपियों के तमाम इकबालिया बयानों में यह साफ है कि 1993 के आरोपियों को मुंबई से दुबई और दुबई से इस्लामाबाद ले जाया गया। जहां आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के कैंपों में उन्हें ट्रेनिंग दी गई।

अबू सलेम ने निभाई थी अहम भूमिका
सीबीआई के अनुसार जनवरी और फरवरी 1993 में रायगढ़ जिले के दिघी, शेखाड़ी तट पर और गुजरात में पाकिस्तान से नावों में भरकर आरडीएक्स लाया गया था। इसमें वे हथियार भी थे, जो टाइगर मेमन के आदमियों को मिले थे। गुजरात में ये हथियार गाड़ियों में छिपाकर मुंबई लाए गए। इस गाड़ी का ड्राइवर नामचीन गैंगस्टर अबू सलेम था।

सलेम और उनके साथियों ने इसके लिए खास जगह का चुनाव किया जहां वे इन खतरनाक हथियारों को छिपा कर रख सके। इसके लिए बांद्रा रोड स्थित लिंकिंग रोड में मैगनम प्रोडक्शन के मालिक हनिफ कड़ावाला और फिल्म निर्माता समीर हिंगोरा का ऑफिस चुना गया। दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम ने कड़ावाला और हिंगोरा को निर्देश दिया कि सलेम के लिए खास जगह मुहैया कराए जाए।

संजय दत्त के घर में रखे गए हथियार
उस समय कड़ावाला और हिंगोरा का अपने मकान मालिक से विवाद चल रहा था। ऐसे में ये लोग ऑफिस में इन हथियारों को छुपाकर कोई और खतरा मोल लेना नहीं चाहते थे। इसलिए इन लोगों ने संजय दत्त के घर में हथियार रखने का सुझाव दिया। संजय दत्त ने इन लोगों की बात मान ली।

हालांकि हिंगोरा को अब भी डर था कि कहीं संजय के घर के बाहर तैनात गार्ड्स को कहीं इस योजना का शक न हो जाए। इसलिए दूसरे रास्ते से दत्त के गैरेज में हथियारों से लदी कार ले जाया गया।

गार्ड्स को धोखे में रखकर हथियार रखा
एक जांच अधिकारी ने बताया, '1992-92 दंगों के दौरान मुंबई पुलिस ने सुनील दत्त और संजय दत्त की सुरक्षा के लिए उनके घर गार्ड्स की नियुक्ति की थी। जहां पर ये गार्ड्स तैनात थे वहां से गैरेज ठीक सामने दिखता था। दत्त ने इन गार्ड्स को दूसरे गेट की ओर जाने को कहा कि जिससे वे गाड़ी को गैरेज में ला सके।

संजय दत्त ने इनमें से कुछ हथियारों (तीन-चार हैंड ग्रेनेड) को अपने पास रखा और बाकी को सलेम को सौंप दिया। इन हथियारों को रखने के लिए संजय दत्त को बैग दिए गए।'

दत्त ने बाद में अनीस इब्राहिम को बताया कि इन हथियारों को उसके घर में रखने से खतरा है। अबू सलेम का गुर्गा मंसूर अहमद संजय के घर पहुंचा और वहां से इन हथियारों को ले गया।

जब पुलिस ने मुंबई ब्लास्ट केस में हिंगोरा और कड़ावाला की गिरफ्तारी की तब उन्हें संजय की भूमिका का पता चला। उस समय संजय मॉरीशस में 'आतिश' फिल्म की शूटिंग कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में तब तक चुप्पी साधी रखी जब तक संजय भारत वापस नहीं आ जाता।

एके-56 रायफल नष्ट कर नहीं पाया संजय का दोस्त
हालांकि एक अखबार में केस को लेकर छपी खबर के बाद संजय दत्त डर गया और उन्होंने अपने दोस्त यूसूफ नुलवाला से हथियारों को नष्ट करने को कहा।

नुलवाला एके-56 रायफल को नष्ट करने मेरीन लाइंस स्थित एक ढलाईखाना ले गया लेकिन वह ऐसा करने में असफल रहा। बाद में वह एके-56 रायफल को अपने घर ले आया जहां उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रायफल को बरामद किया।

इसके अलावा 9एमएम की एक और पिस्तौल यूसुफ नष्ट नहीं कर पाया जिसे बाद में संजय को उसने लौटा दिया। यह पिस्तौल भी बाद में पुलिस ने बरामद की। दत्त ने भी माना था कि उसने केवल एक पिस्तौल अपनी सुरक्षा के लिए रखा था।

अनीस के साथ बातचीत से संजय पर संदेह
हालांकि अब भी जांच अधिकारी संजय की भूमिका पर सवाल उठाते हैं। अधिकारी का कहना है, 'संजय दत्त अपनी सुरक्षा के लिए कैसे अनीस इब्राहिम से पिस्तौल ले सकता है। दोनों के बीच बातचीत का टेलीफोन रिकॉर्ड है, जिसे अदालत में पेश किया गया था। इसमें संजय अनीस को अपने घर से ग्रेनेड ले जाने को कह रहे हैं। इस प्रकार संजय ने केवल अवैध हथियार रखने का ही जुर्म नहीं किया बल्कि वह आतंकी साजिश का हिस्सा भी रहा।'

हालांकि टाडा कोर्ट ने संजय दत्त को आतंकी होने के आरोप से बरी कर दिया था और आर्म्स एकट के तहत छह साल की सजा सुनाई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को घटाकर पांच साल कर दी।
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उल्लेखनीय है कि बीस साल पहले हुए मुंबई में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में 257 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे।
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