प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2014 को बतौर भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार हिमाचल में आयोजित एक रैली में कहा कि था कि इस समय केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस सरकार का अहंकार सातवें आसमान पर है। कांग्रेसी नेता महंगाई पर कुछ बोलते ही नहीं।
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नरेंद्र मोदी ने कांग्रेसियों से सवाल पूछते हुए कहा था कि 100 दिन में महंगाई घटाने के दावे का आखिरकार क्या हुआ?
मोदी ने कहा था कि जो ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, जिन्होंने देश की सेवा की है, जो सैलरी पर काम करते हैं, लेकिन देश के लिए काम करते है उन्हें हम फायदा देंगे।
विदेशों से कालाधन लाकर हम इन ईमानदार लोगों के बीच उसका एक हिस्सा बांट देंगे। देश में अगर भ्रष्टाचार की जननी कोई है तो वह सिर्फ कांग्रेस है। अगर कांग्रेसियों ने भ्रष्टाचार नहीं किया है तो वे विदेशों में जमा कालेधन को क्यों नहीं लाते हैं।
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आडवाणी ने निकाली थी कालेधन के खिलाफ यात्रा
20 नवंबर 2011 को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने दिल्ली के रामलीला मैदान पर जमकर सरकार तब की सत्तारूढ यूपीए सरकार के खिलाफ जमकर बरसे थे।
काले धन और भ्रष्टाचार को आडवाणी की तरफ से बिहार से निकाली गई जनचेतना यात्रा को दिल्ली में खत्म करते हुए आडवाणी ने कहा था कि उनकी यात्रा जरूर खत्म हुई है लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग अभी पूरी नहीं हुई है।
आडवाणी ने कहा था कि सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में इसलिए नाकाम रही है क्योंकि उसके पास भ्रष्टाचार को रोकने की नीयत नहीं है। यही नहीं, आडवाणी ने यह तक कह डाला था कि एनडीए के सभी सांसद लिखित में देंगे कि विदेशी बैंकों में उनकी किसी तरह की संपत्ति नहीं है।
दरअसल भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर 40 दिन की जनचेतना यात्रा खत्म करते हुए लाल कृष्ण आडवाणी ने केंद्र पर जमकर हल्ला बोला था। आडवाणी के मुताबिक उनकी यात्रा भले ही खत्म हो गई है लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग अभी पूरी नहीं हुई है।
आडवाणी ने कहा कालेधन के मुद्दे पर तब कि यूपीए सरकार को घेरते हुए कहा कि कालेधन पर सरकार चुप क्यों है। उन्होंने मांग की कि तीन सांसद भी हैं जिनके विदेशी बैंकों में खाते हैं उनके नाम भी सार्वजनिक होने चाहिए।
आडवाणी बिहार के सिताबदियारा से लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन 11 अक्टूबर को जनचेतना यात्रा पर निकले थे। 40 दिन के सफर के दौरान आडवाणी की जनचेतना यात्रा 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों से होकर गुजरी। आडवाणी की ये छठी रथयात्रा थी।
'मनमोहन सिंह व्यवस्था को दुरस्त नहीं कर सकते तो प्राणायाम करें'
बाबा रामदेव ने कांग्रेस पर देश की लुटिया डुबो देने का आरोप लगाया था। रामदेव ने कहा था कि चुनाव से पहले ही देश ने नरेंद्र मोदी को चुन लिया है। इसलिए वे लोकतंत्र को लूटतंत्र में तब्दील होने से बचाएं।
योग गुरु ने कई तरह के कर की व्यवस्था को खत्म कर एक कर की व्यवस्था की भी वकालत की थी। उन्होंने कहा कि एक पार्टी ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया है। उन्होंने मोदी को कांग्रेस के लिए महाकाल बताया।
नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में बाबा रामदेव ने कहा था कि देश को उनसे काफी उम्मीदें हैं। रामदेव ने कहा था कि मोदी देश की गलत आर्थिक नीतियों को दुरुस्त करने का आश्वासन दें। उन्होंने मोदी से पूछा था कि वे किसानों, कालेधन और हमारे कई अन्य मुद्दों पर क्या रुख अपनाएंगे।
मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए रामदेव ने कहा कि गलत आर्थिक नीतियों की वजह से ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कहना पड़ता है कि वो हिंदुस्तान से गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई को खत्म नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री इन बुराइयों को खत्म नहीं कर सकते तो वहां क्यों बैठे हैं। जिन्हें देश चलाने आता है, उन्हें चलाने दें।
अगर प्रधानमंत्री व्यवस्था को दुरुस्त नहीं कर सकते तो हमारे साथ प्रणायाम करें। योग गुरु ने कहा कि कालेधन और भ्रष्टाचार की वजह से स्थिति नाजुक हो गई है। उन्होंने कहा कि मूल्य नीति के बजाय आय नीति के आधार पर देश के 60 करोड़ किसानों के लिए राष्ट्रीय किसान आय आयोग गठित किया जाए।
जेटली ने जल्द कालेधन का ब्यौरा मिलने का किया था वायदा
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार स्विट्जरलैंड को वहां के बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा कालेधन का ब्योरा शीघ्रतापूर्वक उपलब्ध कराने के लिए लिखेगी।
जेटली ने कहा था कि हम आज अपनी ओर से स्विट्जरलैंड सरकार को पत्र लिख रहे हैं जिसके साथ मंत्रालय संपर्क है ताकि सरकार के पास जो भी सूचना है उसे प्रदान करने में शीघ्रता बरती जाए और वहां की स्विट्जरलैंड के अधिकारियों व भारत सरकार के बीच सहयोग का लाभप्रद नतीजा निकले। हमारी ओर से आज ही पत्र भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा था कि भारत सरकार को उन भारतीयों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में सक्रियता से सहयोग करना चाहते हैं जिनके खाते वहां के बैंकों में हैं।
स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक एसएनबी द्वारा प्रकाशित ताजा आंकड़ें के मुताबिक यहां के विभिन्न बैंकों में जमा भारतीय धन 2013 में 43 प्रतिशत बढ़कर 14,000 करोड़ रुपये हो गया जिसमें सीधे तौर पर भारतीय ग्राहकों द्वारा रखा गया धन और संपत्ति प्रबंधकों के जरिये जमा की गई राशि शामिल हैं।
कालेधन को वापस लाने के प्रयासों के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल ने अपने कार्यकाल के पहले दिन ही काले धन की पता लगाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।
न्यायमूर्ति एमबी शाह की अध्यक्षता वाली एसआईटी की पहली बैठक 2 जून को हुई। इस दल के अन्य सदस्यों में उच्चतम न्यायालय एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरिजित पासायत को उपाध्यक्ष हैं। इनके अलावा इस दल में राजस्व सचिव, केंद्रीय जांच ब्यूरो, खुफिया विभाग, रॉ और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक के एक डिप्टी गवर्नर भी शामिल हैं।
एसआईटी दायरे में वे सभी मामले शामिल होंगे जिनकी जांच शुरू की जा चुकी है और जो लंबित हैं या जिनकी जांच शुरू होनी बाकी है या फिर जिनकी जांच पूरी हो चुकी है।
भारत उन 36 देशों में शामिल है जिनके साथ स्विट्जरलैंड ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक कर संबंधी मामलों की जांच में आधिकारिक स्तर पर सहयोग के संबंध में संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं।
विजयवाड़ा में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा था केन्द्र सरकार से मांग की थी कि वह विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के लिये कदम उठाये।
स्वामी ने यहां एक समारोह में कहा था कि केन्द्र सरकार को विदेशी बैंकों में जमा 70 लाख करोड़ रूपये को वापस लाने के लिये कदम उठाने चाहिए। अगर हम विदेशी बैंकों का सारा धन वापस लाते हैं तो देश के लोगों को अगले 15 साल तक किसी तरह का कर नहीं चुकाना पडे़गा।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का सफाया होना चाहिये अन्यथा हम विकास नहीं कर सकेंगे। भ्रष्टाचार हर वर्ग में फैला हुआ है, खासकर उच्च वर्ग में। स्वामी ने कहा था कि प्रभावशाली भ्रष्टाचार से पद और सीट खरीद रहे हैं । आगामी चुनाव में जनता भ्रष्ट नेताओं को जरूर चुनाव हरा देगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में विफलता का आरोप भी लगाया था।