दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप पर पूरा देश सन्न है, गुस्से में है और शर्मिंदा भी। हम ऐसे देश में रह रहे हैं जहां की राजधानी में सरेआम वाहन में लड़की को अगवा किया जाता है और उससे गैंगरेप होता है। दिल्ली में हुए गैंगरेप ने फिर हमारी सुरक्षा व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा जड़ा है और हम स्तब्ध हैं कि आखिर क्यों और कब तक यह घिनौना कृत्य देश की महिलाओं के साथ होता रहेगा?
ऐसा नहीं है कि देश में रेप का यह कोई पहला मामला है। देश भर में रेप के मामले तेजी से ब़ढ़ते जा रहे हैं। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। रेप जैसा जघन्य अपराध किसी एक राज्य या शहर तक सिमटा हुआ नहीं है। देश में हर 76 मिनट पर एक नाबालिग के साथ रेप हो रहा है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि उत्तर हो या दक्षिण, पूरब हो या पश्चिम रेप की वारदातें हर जगह हो रही हैं। बीते तीन दशकों में रेप के मामले हत्या की वारदातों से आगे निकल गए। यह हमारे समाज, पुलिस और अदालतों के लिए खतरे की दस्तक है।
देशभर में रेप की घटनाएं जितनी तेजी से बढ़ रही हैं, उसने एक बार इस बहस को तेज कर दिया है कि बलात्कारियों के साथ आखिर क्या किया जाना चाहिए? ये बात तो साफ है कि मौजूदा सजा से रेप करने वालों को डर नहीं लगता तो आखिर ऐसा क्या किया जाए?
हमे बताइए कि बलात्कारियों के साथ क्या किया जाना चाहिए?