गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण रद्द कर वार्टन इंडिया इकॉनमिक फोरम सुर्खियों में आ गया है। खबर है कि फोरम ने राहुल गांधी को भी भाषण देने का न्योता भेजा था लेकिन उन्होंने शामिल होने से इनकार कर दिया है।
भारत में नरेंद्र मोदी के समर्थकों ने अमेरिकी बिजनेस संस्थान के फैसले पर नाराजगी जताई है। सोमवार को शिवसेना नेता सुरेश प्रभु ने वॉर्टन स्कूल के फैसले को हास्यास्पद बताया।
उन्होंने कहा, 'मोदी को वार्टन स्कूल से न्योता दिया गया था। मोदी खुद न्योता मांगने उनके पास नहीं गए थे। उनका संबोधन रद्द किया जाना गुजरात के मुख्यमंत्री का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है।'
मोदी को संबोधन रद्द किए जाने से नाराज गुजरात के अदानी समूह ने भी कार्यक्रम की स्पांसरशिप से हाथ वापस खींच लिए हैं। समूह के चेयरमैन गौतम अदानी ने भी इसमें हिस्सा न लेने का फैसला किया है।
हालांकि इस हंगामे के बीच ये भी पूछा जा रहा है वार्टन इंडिया इकॉनमिक फोरम है क्या और यहां किन बातों पर चर्चा होती है?
भारतीय छात्रों का फोरम
वॉर्टन इंडिया इकॉनमिक फोरम में हर साल दुनिया भर के कुछ चुनिंदा राजनेता, बिजनेसमैन, प्रोफेशनल, एकेडिमीशियन और छात्र जुटते हैं।
वॉर्टन यूनिवर्सिटी ऑफ पेनिसिल्वेनिया की मेजबानी में आयोजित इस वार्षिक सम्मेलन में भारत केंद्रित मुद्दों पर चर्चा की जाती है। यह सम्मेलन 1996 में पहली बार आयोजित किया गया था।
पिछले 16 वर्षों से स्टूडेंट्स ही इसका आयोजन करते रहे हैं और भारत के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के मामले इसने अमेरिका ही नहीं दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।
इस सम्मेलन में सालाना 800 लोग शामिल होते हैं। भारत से अब तक इसमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, वित्तमंत्री पी चिदंबरम, भाजपा नेता वरूण गांधी, केवी कामथ, अनिल अंबानी और सुनील मित्तल हिस्सा ले चुके हैं।
इस बार कौन हैं मुख्य वक्ता
वॉर्टन इंडिया इकॉनमिक फोरम का वार्षिक सम्मेलन इस वर्ष 23 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। फोरम की ओर से अब तक जिन वक्ताओं का नाम तय किया गया है, उनमें योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया और दूरसंचार मंत्री मिलिंद देवड़ा प्रमुख हैं। सम्मेलन में अरविंद केजरीवाल को भी मुख्य वक्ता के रूप बुलाया गया है।
सम्मेलन में मीडिया और इंटरटेनमेंट के पैनल में चर्चा के लिए जावेद अख्तर, शाबाना आजमी, बोमन इरानी, सुधीर मिश्रा को भी बुलाया गया है।
सम्मेलन के पैनलिस्ट में सुरेश प्रभु भी शामिल हैं। हालांकि अब उन्होंने वहां जाने से इनकार कर दिया है। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, मीडिया और मनोरंजन, विदेशों में रह रहे भारतीयों, फाइनेंस और राजनीति पर चर्चा होनी है।