1. वित्त मंत्री अरुण जेतली ने बीमा कानून (संशोधन)-2015 विधेयक को राज्यसभा में पेश किया और करीब ढाई घंटे की बहस के बाद सदन ने इसे मंजूरी दे दी।
2. विधेयक को सदन की मंजूरी दिलाने के क्रम में पहले यूपीए सरकार द्वारा पेश बीमा कानून(संशोधन) विधेयक-2008 को वापस लेकर तकनीकी अड़चन दूर की गई।
3. विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिलने के बाद अब बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत तक किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
4. अब विदेशी निवेशक भारतीय बीमा कंपनी से सीधे उसकी 49 फीसदी तक की हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। शेयर बाजार से भी कंपनी के 49 प्रतिशत तक की खरीद की छूट दे दी गई है। निवेशक प्रत्यक्ष निवेश, पोर्टफोलियो रूट अथवा दोनों में से किसी को भी अपना सकेगा।
5. देश की बीमा कंपनी में 26 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी के लिए विदेशी निवेशक को ‘फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड(एफआईपीएस)’ की अनुमति लेनी होगी।
6. बीमा संशोधन विधेयक के कानून की शक्ल लेने के बाद विशेषज्ञ इसे मोदी सरकार के पहले आर्थिक सुधार के चरण के तौर पर देख रहे हैं। इस क्रम में जल्द ही 20 हजार करोड़ रूपए के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसा अनुमान है कि 2015 के अंत तक बीमा क्षेत्र में करीब 40-60 हजार करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है।
क्या पाएगा ग्राहक
नए बीमा कानून से ग्राहक को परोक्ष रूप से लाभ होगा।
1. बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने से पूंजी आएगी।
2. कंपनियों के बीच में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वह ग्राहक को सुविधाओं और लाभ का ऑफर देकर लुभाएंगी।
3. बीमा क्षेत्र के एजेंट की नियुक्ति अब इरडा की बजाय बीमा कंपनियां करेंगी। इससे कंपनियां अच्छी संख्या में एजेंट रख सकेंगी।
4. एजेंट रखने के प्रावधान में बदलाव के कारण रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा बीमा क्षेत्र के प्रसार में मदद मिलेगी।
संभावनाओं वाला बाजार
भारत दुनिया के बड़े बीमा बाजारों में से एक है। देश में 52 इंश्योरेंस कंपनी हैं लेकिन पूरी आबादी की 25 फीसदी को सामान्य बीमा कवरेज हासिल है। इस लिहाज से भारत में बीमा बाजार की भारी संभावना है।
चूंकि देश की बीमा कंपनियों को पास विस्तार के लिए बड़े फंड नहीं है इसलिए विदेशी निवेश जरूरी है। अब तक इस सेक्टर में 26 फीसदी विदेशी निवेश की मंजूरी थी लेकिन बीमा बिल पारित हो जाने के बाद यह 49 फीसदी हो जाएगी। विदेशी फंड आने से भारतीय बीमा कंपनियों को अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तीन चौथाई आबादी को फायदा
विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने वाला मूल बीमा बिल 2008 में कांग्रेस सरकार में लाया गया था। लेकिन अब नए बिल ने इसकी जगह ले ली है।
देश में वर्ष 2013 तक बीमा बाजार 66.4 अरब डॉलर का था, जो 2020 तक 350 से 400 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। बीमा बाजार सही रफ्तार से बढ़ा तो 2020 तक देश के 75 करोड़ लोग बीमा कवरेज के दायरे में आ जाएंगे।
क्यों जरूरी है विदेशी निवेश
चूंकि बीमा सेक्टर में निवेश लंबी अवधि के होते हैं। इसलिए सरकार के पास लंबी अवधि के लिए फंड इकट्ठा हो जाता है। यह फंड देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के काम आता है।
चूंकि बैंक लंबी अवधि की परियोजनाओं की वजह से इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को ज्यादा फंड नहीं देता है इसलिए बीमा कंपनियों की ओर से मिलने वाला कर्ज काम आता है। देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में फंड की कमी को देखते हुए बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाना काफी मददगार साबित होगा।