विधानसभा चुनाव के दौरान पानी पी-पी कर भाजपा को कोसने वाली शिवसेना अब महाराष्ट्र में गठित होने वाली सरकार में शामिल होने के लिए फड़फड़ा रही है। अंदरखाने चल रही चर्चाओं पर विश्वास करें तो इस मुद्दे को लेकर पार्टी दो धड़ों में बंट चुकी है।
यदि वह भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में शामिल नहीं हुई तो पार्टी में टूट भी हो सकती है। इसी वजह से शिवसेना के नेता भाजपा के रूखे रवैये के बावजूद सरकार में शामिल होने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 25 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना के रणनीतिकार हालात का सही आकलन नहीं कर पाए। पूरे चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया गया।
अफजल खां से लेकर मोदी के पिता तक को घसीटा गया। चुनाव परिणामों में 122 सीटें हासिल करने वाली भाजपा निर्दलीय और छोटे दलों की मदद से 138 विधायकों का समर्थन हासिल कर चुकी है जोकि बहुमत के आंकड़े से मात्र 6 कम है।