दो दिनों तक केदारनाथ में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मंगलवार को सुरक्षित निकाले गए केदारनाथ मंदिर में सह वेदपाठी रविंद्र भट्ट के चेहरे पर अब भी खौफ दिखाई दे रहा है।
रविंद्र भट्ट ने बताया कि 16 जून को शाम आठ बजे तक धाम में सब कुछ सामान्य था। हल्की बारिश हुई थी, लेकिन अचानक 8:15 बजे मंदिर के ऊपर से पानी का सैलाब सा आता दिखा।
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भट्ट के अनुसार वह जान बचाकर भागे और अन्य तीर्थ यात्रियों की तरह मंदिर में शरण लेने पहुंचे। रातभर लोग एक दूसरे को ढांढस बंधाते हुए बारिश रुकने की प्रार्थना करते रहे। रात कब गुजरी किसी को पता नहीं चली।
17 जून को सुबह 6:55 बजे एक बार फिर पानी का सैलाब आया। इसने धाम में काफी तबाही मचाई और आगे बढ़ गया। उन्होंने बताया कि इस तबाही के बाद धाम में कई शव बिखरे दिखे।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में उपचार करा रहे सीओ आर डिमरी बताते हैं कि वे और एसडीएम राकेश तिवारी रात में पानी बढ़ने पर गेस्ट हाउस छोड़कर केदारनाथ मंदिर के बगल में स्थित धर्मशाला में जाने को तैयार हुए।
तभी तेज पानी आया और वे बहने लगे। बड़ी मुश्किल से बाहर निकल कर मंदिर में पहुंचे। 16 की रात को भारत सेवा आश्रम में पानी घुस गया। 17 की सुबह लगभग सात बजे गांधी सरोवर से आया पानी का सैलाब पत्थरों और बोल्डरों के साथ मंदिर पर जोर मारने लगा।
तस्वीरों में देखिए केदारनाथ की तबाही
इससे मंदिर के अगल-बगल कटाव हो गया। उन्होंने किसी तरह मंदिर के अंदर घुसकर एक पिलर को पकड़ लिया। पानी वीआईपी गेट से घुसा और मुख्य दरवाजे से बाहर निकल गया।
इस दौरान जो किसी चीज को पकड़ नहीं पाया वह पानी में बह गया। कई पुलिस और पीएसी के जवानों का कोई पता नहीं हैं।
तस्वीरों में: उफान पर यमुना
पुलिस जवान महेंद्र भट्ट और पीएसी जवान विकास गुसाईं के मुताबिक सबसे अधिक नुकसान 17 जून की सुबह आई बाढ़ ने किया। वे दो दिन से भैरवनाथ मंदिर में ही बैठे रहे।
तबाह हो चुके गौरीकुंड से लौटे महेश बगवाड़ी के मुताबिक उन्होंने कुछ लोगों को पानी में बहते देखा। मंदाकिनी नदी में बह चुके भारत सेवा आश्रम की धर्मशाला में तीन सौ यात्री रुके थे, उनका भी पता नहीं है।