फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोधरा में जो हुआ, क्या अब भी एक रहस्य है?

Wed, 27 Feb 2013 12:02 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मारकंडेय काटजू ने हाल में लिखे एक आलेख में कहा कि गोधरा में क्या हुआ अब भी एक रहस्य है। इस बयान ने विवादों का नया पिटारा खोल दिया। जस्टिस काटजू ने गोधरा के बाद हुए दंगों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया।
विज्ञापन


भाजपा काटजू के बयानों से सख्त नाराज हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने उन्हें पीसीआई चेयरमैन पद से हटा देने की मांग कर डाली। भाजपा ने काटजू पर अर्धन्यायिक पद पर होते हुए राजनीति करने का आरोप लगाया और उन्हें 'कांग्रेस से भी अधिक कांग्रेसी' करार दिया।

क्यों विवादों में आया गोधरा
हालांकि इस विवाद ने गोधरा कस्बे को सुर्खियों में ला दिया। गोधरा में क्या हुआ था, एक बार फिर उस पर चर्चा होने लगी। गोधरा में जो हुआ, क्या वह अब भी एक रहस्य है, ये सवाल एक बार फिर पूछा जाने लगा।
विज्ञापन


गुजरात का गोधरा 27 फरवरी 2002 के पहले तक एक अंजान से कस्बा था। लेकिन इसी दिन अयोध्या से आ रही साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग में 59 कारसेवकों की मौत हो गई।

आरोप लगे की ये दुर्घटना पूर्व नियोजित थी। स्थानीय लोगों की भीड़ ने एक स्थानीय मुस्लिम नेता के भड़काने पर ट्रेन पर पत्थर फेंके थे और आगजनी की। आगजनी की वारदात में ट्रेन की एस-6 बोगी में बैठे कारसेवक मारे गए।

गुजरात दंगों कारण बना
गोधरा में हुई वारदात के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे। दंगों में 1000 से अधिक मुसलमान मारे गए। राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार पर दंगे न रोक पाने का आरोप लगा। खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 'राजधर्म' निभाने की नसीहत दी।

फिर भी भाजपा ने लगातार कहा कि गुजरात के दंगे गोधरा कांड की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थे। हालांकि मीडिया समेत राजनीति दलों और सामाजिक संगठनों का एक धड़ा इस तर्क को खारिज करता रहा और गोधरा को महज एक दुर्घटना मानता रहा।

दो-दो आयोगों ने की जांच
गोधरा कांड कैसे हुआ? ये एक दुर्घटना थी या सजिश? इसकी जांच के लिए दो-दो आयोगों का गठन किया गया। गुजरात सरकार ने गोधरा कांड की जांच के लिए जस्टिस तेवतियां आयोग का गठन किया। आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में आगजनी की वारदात को पूर्व नियोजित माना।

आयोग ने कहा कि गोधरा में अग्निशमन की सुविधाएं बहुत खराब थीं। ट्रेन को यहां जानबूझ कर देर तक रोका गया। इसमें स्थानीय कांग्रेस पार्षद की हाजी बलाल की सक्रिय भूमिका थी। आयोग का कहना था कि इस साजिश का मकसद देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे कराना था।

सितंबर, 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज यूसी बनर्जी की अध्यक्षता में गोधरा कांड की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति ने तेवतियां आयोग से बिलकुल अलग रिपोर्ट दी।

समिति ने माना कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 बोगी में लगी आग एक दुर्घटना थी। यह आग अंदर से लगी थी। आयोग ने कहा कि आगजनी के वक्त ट्रेन जहां खड़ी थी, वहां से इसकी बोगियों में बाहर से आग लगा पाना संभव नहीं था। दो आयोगों की जांच के बाद भी गोधरा में आगजनी कैसे हुई थी, इसके कारणों पर पर आज तक सहमति नहीं बन सकी।

अदालत ने 31 को माना दोषी
हालांकि गुजरात की एक विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी माना। अदालत ने इन्हें साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 बोगी में आगजनी की साजिश करने ओर हत्या के आरोपों में सजा दी। इसी मामले में 63 लोगों का बरी कर दिया गया।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें