जब तहलका के फाउंडर-एडिटर तरुण तेजपाल ने इस हफ्ते की शुरुआत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की, तो भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का नाम उनकी याचिका में प्रमुखता से लिया गया।
बंगारू लक्ष्मण साल 2001 में तहलका के पहले स्टिंग ऑपरेशन का शिकार बने थे। वह हथियार डीलर बनकर आए पत्रकारों से पैसा लेते वीडियो में पकड़े गए थे। इस घटनाक्रम की वजह से एनडीए को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस घटना के 12 साल बीतने के बाद अब बंगारू लक्ष्मण्ा खराब सेहत की वजह से अब व्हीलचेयर तक सिमट गए हैं, लेकिन तेजपाल से जुड़ी हर खबर पर उनकी निगाह टिकी है।
73 वर्षीय बंगारू लक्ष्मण ने कहा, "मैंने अभी सुना है कि तेजपाल ने गोवा पुलिस के सामने पेश होने के लिए शनिवार तक वक्त मांगा है। अगर वह नैतिक मूल्यों के लिए खड़े होने वाले साहसी पत्रकार हैं, तो उन्हें किस बात का डर?"
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वह और तहलका सिस्टम को साफ करना चाहते थे, भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना चाहते थे। उन्होंने नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें कही थीं। लेकिन वे खुद इन पर खरे नहीं उतरे। एक बहादुर महिला ने तेजपाल का पर्दाफाश कर दिया।"
लक्ष्मण को स्टिंग ऑपरेशन की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा और अप्रैल द2012 में उन्हें चार साल कैद हुई। लेकिन उन्होंने इसे चुनौती दी और अक्टूबर 2012 में वह जमानत पर रिहा हो गए।
उन्होंने कहा, "मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए इन दिनों मैं सारा दिन घर पर ही रहता हूं। मैंने कई महीने अस्पतालों में गुजारे हैं, क्योंकि मैं पैर तक नहीं हिला पाता था।"
तेजपाल के यौन शोषण के आरोपों में फंसने पर उन्होंने कहा, "किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं खुश हूं। तहलका ने नैतिकता का बुलबुला बनाया था...लेकिन अब उनका नेता ही फंस गया है। मैंने वो 1 लाख रुपया नहीं मांगा था, जो मैं स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। अंडरकवर पत्रकारों ने मुझे फंसाया।"
लक्ष्मण ने कहा, "मैंने इस फंसाए जाने की बड़ी कीमत चुकाई है। जब कभी भाजपा भ्रष्टाचार को लेकर यूपीए पर हमला बोलती है, कांग्रेसी नेता मेरा नाम उछालते हैं। मुझे बलि का बकरा बनाया गया।"
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