वार्टन की ओर से नरेंद्र मोदी का संबोधन रद्द किए जाने पर केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने चिंता जाहिर की है। थरूर ने कहा कि संस्थान को गुजरात के मुख्यमंत्री को आमंत्रित किए जाने के बाद उन्हें सुनना चाहिए था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस पार्टी या सरकार की ओर से ऐसा नहीं कह रहे हैं बल्कि अपना ‘व्यक्तिगत नजरिया’ जाहिर कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि मैं मोदी से हर स्तर पर पूरी तरह असहमति रखता हूं लेकिन मुझे लगता है कि उनका निमंत्रण रद्द कर उनकी आवाज को दबाने से ज्यादा बेहतर है कि उनके रिकॉर्ड और विचारों पर बहस की जाए। अगर वार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम ने एक बार उन्हें निमंत्रण भेजा था तो उन्हें मोदी के विचारों को सुनना उनका कर्तव्य था।
मोदी के पक्ष में बोले धुमे
वॉल स्ट्रीट जर्नल के स्तंभकार सदानंद धुमे ने भी वार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम द्वारा नरेंद्र मोदी का संबोधन रद्द करने पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही सदानंद धुमे ने इस आयोजन के मेहमानों की सूची से अपना नाम वापस ले लिया है।
धुमे ने एक समाचार चैनल से कहा कि वार्टन अपने कार्यक्रम में किसी को भी बुलाने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर उन्होंने मोदी को आमंत्रित कर लिया है तो उन्हें इस फैसले से अपने कदम पीछे नहीं हटाना चाहिए था।
अमेरिकी अखबार के जनमत सर्वे में 94 फीसद लोगों ने मोदी के आमंत्रण रद करने को गलत माना है।
क्या है मामला
तय कार्यक्रम के अनुसार मोदी को 23 मार्च को फिलाडेल्फिया स्थित पेन्सिलवेनिया विवि के वार्टन स्कूल के फोरम को मुख्य वक्ता के रूप में वीडियो कांफ्रेसिंग से संबोधित करना था। लेकिन वार्टन ने अचानकर मोदी के आमंत्रण को रद्द कर दिया।
मीडिया में यह भी खबर आई कि मोदी की जगह आम पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। हालांकि कार्यक्रम के आयोजकों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है कि केजरीवाल फोरम को संबोधित करेंगे ही।
उधर केजरीवाल ने भी उन खबरों का खंडन किया है कि वह वार्टन के फोरम में वक्ता के रूप में मोदी का स्थान लेने जा रहे हैं।
वार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम 1996 से इस कार्यक्रम का आयोजन करती आ रही है। इसमें दुनियाभर से लोगों को आमंत्रित किया जाता है। फोरम के वक्ताओं का चयन छात्र करते हैं।