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नरेंद्र मोदी के प्रति नरम होती जा रही है दुनिया

Wed, 06 Mar 2013 12:35 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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दस साल का बेहतरीन राजकाज हो या फिर प्रधानमंत्री पद की बड़ी दावेदारी, नरेंद्र मोदी के दामन पर लगा गुजरात दंगों का दाग धीरे धीरे धुल रहा है। इसकी बानगी मोदी के प्रति अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के नरम होते रुख में दिख रही है।
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कुछ भी कहें, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से स्वीकार्य होते जा रहे हैं। अगला लोकसभा चुनाव 2014 में है। ऐसे में अभी से ही नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का सबसे सशक्त दावेदार माना जा रहा है। इस कड़ी में अंतरराष्ट्रीय पटल पर उनकी बदलती छवि बेहद मददगार साबित हो सकती है।

जर्मनी ने नरेंद्र मोदी का लोहा माना
यूरोपीय यूनियन व ब्रिटेन के बाद अब जर्मनी ने भी मोदी की प्रशासनिक क्षमता को सराहा है। टाइम मैगजीन ने भी अपने कवर पेज पर मोदी को जगह देकर इसका संकेत दिया था। इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि संभावित ही सही एक सशक्त उम्मीदवार से रिश्ते मधुर करने का प्रयास चल पड़ा है।
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यूरोपीय संघ से एक दशक पुराना बायकॉट खत्म
सात फरवरी को यूरोपीय संघ ने नरेंद्र मोदी का एक दशक पुराना बायकॉट खत्म कर दिया। गोधरा दंगों के बाद यूरोपीय संघ ने मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था। लेकिन पिछले दिनों मोदी ने यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में भोज किया था। इसमें इन देशों ने मोदी का बायकॉट खत्म करने की घोषणा की थी।

यूरोपीय संसद में शामिल होने का न्यौता
यूरोपीय सांसदों ने उन्हें इस साल (मई, 2013) ब्रुसेल्स में होने वाली अपनी संसदीय बैठक में शामिल होने का न्यौता दिया। यूरोपीय संसद में यूरोप के 27 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ये इस बात का संकेत है कि यूरोप मोदी को भविष्य में भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप देख रहा है।

ब्रिटेन के रुख में भी परिवर्तन
हाल ही में भारत दौरे पर आए ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने कहा था कि ब्रिटेन नरेंद्र मोदी को मई में आमंत्रित करने के लिए वीजा जारी करेगा। ब्रिटेन में गुजराती मूल के लोगों की बड़ी तादाद है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि गुजरात सरकार से संबंध बनाकर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है।

पिछले महीने वाइब्रेंट गुजरात समिट में भी ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की थी। चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जब दिल्ली आए थे तो जर्मन राजदूत एम स्टेनर के घर पर यूरोपीय यूनियन के देशों के राजदूत उनसे लंच पर मिले थे।
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