अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी को भारत की सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं। टुंडा 1990 के दशक में मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली के धमाकों का आरोपी है। उसका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से है। इससे पहले वह जैश-ए-मोहम्मद और मरकज-उल-दावा के लिए भी काम कर चुका है।
टुंडा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के पिलखुवा का रहने वाला है। उसे 1980 के दशक में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने प्रशिक्षित किया।
टुंडा उसके बाद पाकिस्तान से बंगलादेश चला गया जहां रोहिंज्ञा युवकों को आतंकवादी के रप में शामिल करने की संभावनाओं का पता लगाने लगा।
पकड़ा गया लश्कर का खूंखार आतंकी टुंडा
आतंकवादियों में शामिल होने से पहले टुंडा 1980 के दशक में होम्योपैथिक दवाओं की दुकान चलाता था।
वह लश्कर के युवा आतंकवादियों को प्रशिक्षित करता तथा भारत में अभियान चलाने में वित्तीय सहायता भी देता रहा है। सूत्रों के अनुसार टुंडा प्रतिबंधित स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया का भी मार्गदर्शन कर रहा है जो बाद में इंडियन मुजाहिदीन बन गया।
टुंडा पर आरोप है कि उसने म्यांमार के रोहिंज्ञा मुसलमानों को बौद्धों पर हमलों के लिए प्रेरित किया था।
कई धमाकों का मास्टर माइंड
टुंडा वर्ष 1996 से 1998 के बीच भारत में अलग अलग स्थानों पर हुए बम विस्फोट का मास्टर माइंड रह चुका है।
दिल्ली, पानीपत, सोनीपत, लुधियाना. कानपुर एवं वाराणसी में हुए बम धमाकों के मास्टरमाइंड टुंडा पिछले दो वर्ष से बंगलादेश, नेपाल एवं संयुक्त अरब अमीरात में छुपा हुआ था।
वर्ष 2000 से 2005 तक माना जा रहा था कि टुंडा मारा जा चुका है।
लश्कर ए तैयबा के शीर्ष सदस्य अब्दुल रजाक मसूद ने 2005 में गिरफ्तारी के बाद टुंडा के जिंदा होने का खुलासा किया था। उसके अनुसार टुंडा की पत्नी और दो बच्चे हें।