अमेरिकी सुपर स्टोर वालमार्ट के रिटेल में एफडीआई की लॉबिंग पर भारत में 125 करोड़ रुपये खर्च करने के खुलासे की केंद्र सरकार ने जांच कराने की घोषणा की है। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों सदनों में कहा कि सरकार इस मसले पर सदन में चर्चा को तैयार है। सरकार इस अहम मुद्दे पर जांच से भी पीछे नहीं हटेगी। सरकार इन आरोपों की तह में जाएगी और तथ्यों को देश के सामने रखेगी।
लॉबिंग से प्रतिष्ठा मिट्टी में मिली
इधर भाजपा के यशवंत सिन्हा ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वालमार्ट ने भारत में लॉबिंग की है। सरकार यह साफ करे कि आखिर वालमार्ट की लॉबिंग से किस-किसको पैसा मिला है? लॉबिंग से देश की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गई है।
संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा
मंगलवार को संसद में इस मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। हंगामा होने से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। हंगामा थमता न देख लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे और बाद में दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इधर पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में सपा सांसदों ने फिर हंगामा किया जिसके कारण राज्यसभा मे भी कार्यवाही नहीं हो सकी।
भारत में लॉबिंग गैर कानूनी
विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मसले पर जवाब दे, वहीं सरकार का कहना है कि संबंधित मंत्री ही इस पर जवाब देंगे। इससे पहले भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने बताया कि वालमार्ट की लॉबिंग का अंदेशा पहले से ही जताया जा रहा था। अब यह सच साबित हो गया है। भारत में लॉबिंग गैर कानूनी है। यह घूस है और सरकार को बताना होगा कि घूस किसे दिया गया।
सोमवार को भी भाजपा समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस लॉबिंग को भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बताते हुए राज्यसभा में सरकार को घेरा था। साथ ही सरकार से इस लॉबिंग में शामिल लोगों के नाम उजागर करने की मांग भी की।
वालमार्ट ने किसी कानून को नहीं तोड़ाः अमेरिका
इधर अमेरिका ने साफ किया है कि वालमार्ट ने किसी भी अमेरिकी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता विक्टोरिया न्यूलैंड ने कहा कि अमेरिकी दृष्टिकोण से वॉलमार्ट ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। हम भारतीय पक्ष का आदर करते हैं। हमें मीडिया में छपी खबरों की जानकारी है। लॉबी डिसक्लोजर एक्ट-1995 और ओपन गवर्नमेंट एक्ट-2007 के तहत वॉलमार्ट ने लॉबिंग से संबंधित सारी जानकारी सरकार को दी है।
क्या है मामला
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक अमेरिकी सीनेट में वालमार्ट संबंधी एक रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने भारत में एफडीआई को मंजूरी दिलाने के लिए लॉबिंग की है जिसमें 125 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनमें 15 करोड़ रुपये इसी साल खर्च किए गए।
सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। अमेरिकी कानून के मुताबिक अमेरिकी कंपनियों को हर तिमाही में लॉबिंग पर किए खर्च का ब्यौरा देना जरूरी है। इस खर्च में कर्मचारियों से जुड़े खर्च, संगठनों की देनदारी, सलाहकारों और अमेरिका में किए गए खर्च शामिल होते हैं।--भारती वालमार्ट के प्रवक्ता