सीबीआई के लिए व्यापम घोटाले की जांच की राह आसान नहीं होगी। जटिल से जटिल मामलों में भी उच्च कोटि की पेशेवर जांच करने में सक्षम होने के बावजूद व्यापम घोटाले का दायरा सीबीआई के लिए कई चुनौतियां खड़ी करने वाला है। इनमें एक तरफ 2007 से 2013 तक हुए घोटाले हैं तो दूसरी तरफ इससे जुड़ी अब तक की 47 मौतें।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार की 10 एसआईटी और हाईकोर्ट के एसटीएफ लंबे समय से इसकी जांच कर रही है। अब निगाहें इस ओर है कि हाईकोर्ट एसटीएफ की काबिलियत पर सवाल खड़ा करते हुए जांच सीबीआई को सौंप दे।
आरोपों के भंवर में फंसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजनीतिक दबाव में सीबीआई जांच की घोषणा तो कर दी है, मगर यह तय करना होगा कि इस जांच का दायरा क्या होगा।
मामले में मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक के नाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में आशंका इस बात की है कि मामले से जुड़े अहम तथ्यों के साथ गंभीर छेड़छाड़ किया जा चुका होगा।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले से जुड़ी पहली मौत 2009 में ही हुई थी। यह समय था जब शिवराज सिंह पर जांच का दबाव पड़ना शुरू हुआ था। इसके बावजूद इस मामले की पहली जांच 2013 में जाकर शुरू हुई।
गौरतलब है कि 2008 से 2012 तक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी खुद शिवराज सिंह चौहान संभाल रहे थे। सीबीआई सूत्रों ने हैरानी जताई है कि मुख्यमंत्री, राज्य पुलिस, एसआईटी और एसटीएफ मिलकर इससे जुड़ी हो रही मौत का सिलसिला नहीं रोक पा रही है।