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बिचौलिया के कंप्यूटर में मिला हेलीकॉप्टर डील का राज

Mon, 18 Feb 2013 09:21 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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पूरा भारत वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील के जो राज जानना चाहता है, वह इस सौदे के स्विस-अमेरिकी मूल के बिचौलिये गुइडो राल्फ हैश्के के कंप्यूटर में मिले हैं। वैसे तो हैश्के डील के सारे राज सदा के लिए दफन करना चाहता था, मगर वह अपने इरादों में नाकाम रहा।
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इटली में मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के अनुसार उसने इस सौदे के अपने कंप्यूटर में दर्ज दस्तावेजों को ‘डिलीट’ और ‘क्लीन’ कर दिया था, लेकिन कंप्यूटर विशेषज्ञों ने इन्हें पुन: हासिल कर लिया।

अब अगर सीबीआई की टीम इटली सरकार को समझाने और मनाने में सफल हो जाती है तो भारत की पहुंच से ये राज बहुत दूर नहीं हैं। भारतीय अधिकारियों का दल सोमवार को इटली रवाना हो रहा है।
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दर्जन भर अगस्ता वेस्टलैंड-101 हेलीकॉप्टरों के सौदे में भारतीयों को 362 करोड़ रुपये की घूस के कंप्यूटरीकृत दस्तावेजों को हैश्के ने अपनी मां के घर छुपा रखा था। इटली के मीडिया में रविवार को यह बात सामने आई। इन दस्तावेजों समेत सौदे के कई कागज पुलिस ने बरामद किए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन दस्तावेजों में दर्ज है कि हैश्के हेलीकॉप्टर सौदे के लिए इटली और दक्षिणी स्विट्जरलैंड के शहर लुगानो में कब-कब सौदे के लिए भारतीय मध्यस्थों से मिला। साथ ही कंप्यूटर से हेलीकॉप्टर कंपनी फिनमेकानिका द्वारा किए गए लेन-देन के भी आंकड़े हैं।

इटली के अखबार डेली रिपब्लिका ने लिखा है कि इन रिकॉर्ड्स के सामने आने के बाद फिनमेकानिका के पूर्व सीईओ गियूसेप्पे ओरसी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। ओरसी ने भारत के साथ हुए 3600 करोड़ रुपये के सौदे में मुख्य भूमिका निभाई थी और इस वक्त पुलिस की हिरासत में हैं। घूस देने के मामले में उनके खिलाफ इटली की अदालत में मामला चल रहा है।

मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के हवाले से मीडिया ने लिखा है, ‘हैश्के ने सोचा था कि उसने अपने कंप्यूटर से सब कुछ ‘डिलीट’ कर दिया है और फिनमेकानिका के लिए उसने जो सौदा किया अब दफन हो चुका है। उसने कंप्यूटर को ‘क्लीन-अप’ कर दिया था और बहुत तसल्लीबख्श ढंग से जिंदगी जी रहा था।’ साथ ही उसने एक सूटकेस में कागजात रखे थे। यह चीजें उसने मां के घर में छुपाई थी। लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया।

डेली रिपब्लिका के अनुसार, ‘बस्टो एरसिजियो अदालत के वकीलों ने हैश्के के जब्त कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव विशेषज्ञों को सौंपी और उसमें से सारे राज सामने आ गए। हेलीकॉप्टर सौदे की पूरी सच्चाई विशेषज्ञों ने ‘रिकवर’ कर ली।’ अब ये कागजों पर अभियोजन पक्ष के वकीलों के पास मौजूद है। जिनकी जांच करके हुए वे घूस के पूरे घटनाक्रम को रेखांकित कर रहे हैं। ऐसे अहम समय में भारत के अधिकारी इटली पहुंच रहे हैं।

सोमवार को इटली रवाना होगा भारतीय दल
इस घूस कांड में इटली द्वारा हासिल दस्तावेजों को जांचने/पाने के इरादे से भारतीय अधिकारियों का दल सोमवार को रोम रवाना होगा। दल में सीबीआई और रक्षा मंत्रालय के लोग हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय दल में सीबीआई के डीआईजी, एक लॉ ऑफिसर, रक्षा मंत्रालय का एक संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी और विदेश मंत्रालय का एक अधिकारी शामिल है। इससे पहले इटली में भारतीय दूतावास अदालती दस्तावेजों को हासिल करने में नाकाम रहा था।

रोम में नियुक्त किया भारत ने वकील
सीबीआई ने इटली की अदालत और सरकार द्वारा सौदे के दस्तावेजों को न दिखाए जाने के सूरत में कानूनी ढंग से बात रखने का फैसला किया है। इसके लिए उसने रोम में एक वकील भी कर लिया है। सूत्रों के अनुसार इस वकील के माध्यम से सीबीआई इटली के कानून को समझने के साथ वैधानिक ढंग से अपनी बात भी रखेगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में सीबीआई ने रक्षामंत्रालय की शिकायत के बावजूद ठोस दस्तावेजों के अभाव में केस दर्ज नहीं किया है।

सौदे में क्या थी हैश्के की भूमिका?
गियूसेप्पे ओरसी ने अगस्ता वेस्टलैंड की डील को हासिल करने के लिए बिचौलिए के रूप में हैश्के की नियुक्ति की थी। सौदे में घूस देने के लिए 362 करोड़ रुपये की अलग रकम रखी गई। रकम तय होने के बाद हैश्के ने भारत में नकली कंपनी बनाने से लेकर रक्षा मंत्रालय/वायुसेना तक पहुंच बनाने का काम शुरू किया। हेलीकॉप्टर की सौदेबाजी में शामिल लोगों को उसने आकर्षित करने की चालें चली।

कैमरन से डील की जानकारी मांगेगा भारत
ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन तीन दिन की राजकीय यात्रा पर सोमवार को मुंबई पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार कैमरन से मुलाकात में भारतीय नेता हेलीकॉप्टर सौदे में घूस का मुद्दा उठाएंगे और इस पर ज्यादा जानकारी की मांग करेंगे।

उल्लेखनीय है कि अगस्ता वेस्टलैंड ब्रिटिश-इतालवी कंपनी है। दोनों देशों का इसमें शेयर है। भारत पहुंचे तीन हेलीकॉप्टर साउथवेस्ट इंग्लैंड में बने थे। भारत पहले ही ब्रिटेन ने इस मामले में जानकारी मांग चुका है, लेकिन उनकी मांग पर ब्रिटेन ने खास तवज्जो नहीं दी।
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