पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की दिमागी उपज समझे जाने वाले सेना के टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (टीएसडी) शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा। हालांकि उनके सेनाध्यक्ष रहते यह विवाद कभी सामने नहीं आया।
टीएसडी द्वारा देश की बड़ी राजनीतिक हस्तियों के अनधिकृत तरीके से फोन सुनने के सबसे पहले उजागर हुए मामले ने उच्चस्तरीय सरकारी हलकों में खलबली मचा दी थी।
2012 की शुरुआत में खुफिया एजेंसी आईबी ने सरकार को जानकारी दी कि टीएसडी के अति आधुनिक तकनीक से लैस वैन 10 जनपथ, 7 रेसकोर्स और कई कैबिनेट मंत्रियों के घर के बाहर खड़े हो कर उनके फोन सुनने की कोशिश करती है।
इस जानकारी के बाद सरकार ने फरवरी 2012 में टीएसडी की इन वैनों को संसद, मंत्रालयों और लुटयिंस दिल्ली में खड़े होने पर पाबंदी लगा दी थी।
टीएसडी की इस वैन में एक निश्चित रेंज के भीतर किसी के भी मोबाइल फोन सुनने की अति सुग्राही तकनीक लगी है।
दिलचस्प बात है कि टीडीएस के गठन की जानकारी पहली बार तब सामने आई जब जनरल वी के सिंह और रक्षा मंत्रालय के बीच उनकी आयु को लेकर विवाद शुरू हुआ।
प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय में अंदरखाने चल रही इस हलचल के बावजूद टीएसडी बिना सरकारी आदेश के कई अनधिकृत कामों में संलिप्त रही।
वर्तमान सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने पिछले साल 31 मई को सेनाध्यक्ष का पद संभालने के बाद टीएसडी को भंग कर उसके कार्यकलापों की जांच के लिए बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी बैठा दी। इस इन्क्वायरी में और कई सनसनीखेज मामले सामने आए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि टीएसडी ने सीक्रेट फंड का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर की सरकार और वहां मौजूद सेना में खलल डालने की कोशिश की।
बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी ने सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से करवाने की अनुशंसा भी की है।