भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मंत्रियों को मीडिया में उठ रहे सवाल परेशान कर रहे हैं। उनकी झल्लाहट भी साफ नजर आने लगी है। नवीन जिंदल और सलमान खुर्शीद के बाद मंगलवार को नंबर था पूर्व केंद्रीय मंत्री और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का। अपने कथित भ्रष्टाचार पर मीडिया द्वारा किए सवालों से वे ऐसे भड़के कि मीडियाकर्मियों को कैमरे तोड़ने की धमकी दे डाली।
वीरभद्र हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक चुनावी रैली के दौरान भ्रष्टाचार और कर चोरी के आरोप संबंधी पूछे गए सवाल पर भड़क गए और बोले, ‘मैं तुम लोगों के कैमरे तोड़ दूंगा। तुम्हें कोई और काम नहीं है क्या?’ हालांकि उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब जबकि कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर बुधवार को मीडिया से माफी मांग ली। कांग्रेस ने उनके व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
फिर बुधवार शाम को शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंक में वीरभद्र ने भी कहा, ‘मैं माफी चाहता हूं। मैंने किसी को आहत करना नहीं चाहता था। मैं उस घटना से व्यथित हूं। माफी मांगता हूं।’ उन्होंने अपने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मैं मीडिया का सम्मान करता हूं। मुझे पता है कि आप सवाल पूछ कर सिर्फ अपना काम कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी समेत पूरी पार्टी को घेरने में लगी कांग्रेस ने वीरभद्र से पहले ही इस मुद्दे पर माफी मांग के मामले को ठंडा करने की कोशिश की। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने मीडिया से कहा कि अगर वीरभद्र सिंह की बात के लिए पूरी पार्टी माफी मांगती है।
उन्होंने दलील दी कि चुनावी रैली में मानसिक और शारीरिक थकान की वजह से कई बार नेता गुस्से में आ जाते हैं। यह उसी हालात का नतीजा है। दीक्षित ने कहा कि वीरभद्र सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनका ऐसा कहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऐसे नहीं मिटेगा सच : भाजपा
कांग्रेस और वीरभद्र की माफी की पेशकश भाजपा को रास नहीं आई है। पार्टी प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने माफीनामे को नकारते हुए कहा कि कैमरा तोड़ने से सच नहीं खत्म होगा। भाजपा वीरभद्र पर लगे आरोपों की जांच की मांग पर अडिग है। नकवी के अनुसार, वीरभद्र को संदेशवाहक को धमकी देने के बजाए संदेश के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए कि वह भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।