रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील में जमीन का इंतकाल रद करने के खेमका के आदेश को परखने के लिए तीन अफसरों की कमेटी के गठन पर डॉ. अशोक खेमका ने टिप्पणी की है कि यह कमेटी मुझे अपमानित करने के लिए गठित की गई है। इस बीच, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व कृष्ण मोहन की अध्यक्षता में तीन अफसरों की जांच कमेटी ने काम करना शुरू कर दिया है। कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव केके जालान और वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव राजन गुप्ता सदस्य हैं।
कमेटी की पहली बैठक कृष्ण मोहन के कार्यालय में सोमवार को हुई थी। चूंकि कृष्ण मोहन अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व हैं, इसलिए उनके पास तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी डॉ. अशोक खेमका के 12 और 15 अक्तूबर को लिखे पत्र मौजूद थे क्योंकि खेमका उन्हें विभागीय सचिव के नाते अपने पत्र भेजते थे। खेमका के पत्र पर मार्ग दर्शन मांगने वाले गुड़गांव के उपायुक्त पीसी मीणा का पत्र भी उनके पास मौजूद था।
उन्होंने खेमका के दोनों और गुड़गांव के उपायुक्त का पत्र केके जालान और राजन गुप्ता को सौंप दिए ताकि दोनों अफसर इन तीनों पत्रों को पढ़ लें। कमेटी की अगली बैठक में तीनों अफसर इन पत्रों पर अपना पक्ष रख लें। कमेटी के सूत्रों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि कमेटी खेमका और उपायुक्त को बुलाए। यह भी संभव है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के महानिदेशक टीसी गुप्ता ने खेमका के इंतकाल रद करने के आदेश पर जो पत्र प्रतिक्रिया स्वरूप मुख्य सचिव पीके चौधरी को लिखा है, वह भी कमेटी के पास भेज दिया जाए।
कोट
रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील के तहत जमीन का इंतकाल रद करने के मेरे आदेश की जांच करने के लिए गठित कमेटी मुझे अपमानित करने के लिए है। कमेटी चाहे मेेरे आदेश को गलत ठहरा दे, लेकिन जो मुद्दा उठाना चाहता था, वह उठ गया है। इंतकाल दो दोबारा कोई भी राजस्व अधिकारी कर सकता है।
-डॉ. अशोक खेमका, तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी, हरियाणा