शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे के बीच शुरू हुई बयानबाजी बृहस्पतिवार को दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक संघर्ष में बदल गई। इसमें कई लोग घायल हो गए, हालात इतने बेकाबू हो गए कि पुलिस को लाठीजार्च करना पड़ा।
घटना मुंबई कलक्टर ऑफिस में उस वक्त हुई जब शिवसेना नेता अरविंद सावंत और मनसे के उम्मीदवार आदित्य शिरोड़कर एक ही समय पर पर्चा भरने पहुंच गए।
इस दौरान मनसे और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी की। मुंबई पुलिस के अनुसार दो कारों को आग के हवाले कर दिया और दोनों ही पार्टियों के कई लोगों को चोटें आईं। इस हंगामे के चलते मुंबई में कई जगहों पर जाम की स्थिति पैदा हो गई और आम लोगों में भगदड़ मच गई। माना जा रहा है कि इस घटना की वजह ठाकरे भाईयों की ताजा बयानबाजियां है जिन्होंने समर्थकों में खासा गुस्सा पैदा कर दिया है।
'बाला साहेब ने आखिरी समय में खाया बड़ा पाव'
इससे पहले उद्धव ठाकरे ने एक जनसभा में राज ठाकरे पर सीधा निशाना साधते हुए कहा था कि जो शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे का नहीं हुआ वो किसी और का क्या होगा। उद्धव ने राज के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी जिसमें राज ठाकरे ने इस चुनाव में शिवसेना को देख लेने की धमकी दी थी।
उद्धव ने कहा था कि हम शेर के बच्चे हैं, बिल्ली के बच्चे नहीं जो कोई हमें देख लेगा। दोनों भाइयों के बीच शुरू हुई ये बयानबाजी बुधवार शाम उस वक्त और संगीन हो गई जब मुंबई के डोंबिवली में एक जनसभा में राज ने साफ-साफ कहा कि उद्धव ने उन्हें बाला साहेब से दूर करने की कोशिश की। राज ठाकरे ने ये भी दावा किया कि जीवन के अंतिम दिनों में बाला साहेब उनके करीब थे।
राज ने मंच से यह कहकर भी सनसनी फैला दी कि बाला साहेब को आखिरी समय में अच्छी देख रेख नहीं मिली और वो वड़ा पाव खाकर गुजारा करने पर मजबूर थे। राज ठाकरे का कहना था कि बाला साहेब उनके कितने करीब थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी समय में उन्होंने खुद फोन करके मुझे बुलाया था।
ठाकरे भाइयों के झगड़े की जड़ बीजेपी
शिवसेना और मनसे की हिंसक टकराव ने महाराष्ट्र की राजनीति मे खलबली मचा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में टकराव और बयानबाजियों का दौर और तेज हो सकता है। शिवसेना और मनसे से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस ताजे बवाल की जड़ बीजेपी है।
राज ठाकरे ने पर्दे की ओट में बीजेपी से हाथ मिलाकर उद्धव को ऐसा झटका दिया है जिससे वो अभी तक उबर नहीं पाए हैं। राज ने बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं खड़े किए हैं लेकिन शिवसेना के खिलाफ कद्दावरों को टिकट दिया है। शिवसेना इससे खुद को सांसत में महसूस कर रही है।
दूसरी तरफ राज ठाकरे को इस बात की नाराजगी है कि उद्धव ने बीजेपी के साथ बढ़ रहे उनके मेलजोल को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया। अब दोनों भाई बाला साहेब के मुद्दे पर जनता को जगाने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि महाराष्ट्र की सियासत में उसका फायदा होना तय है जो ये साबित कर देगा कि बाला साहेब उसके ज्यादा करीब थे।