बिहार सरकार ने न्यायालय में सभी कैदियों का उपस्थापन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराये जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को पटना में संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद जेल महानिरीक्षक आनंद किशोर ने बताया कि इस वक्त प्रदेश में प्रभावी ‘जेल मैनुअल’ 1924 में बनाया गया था और उसके बाद 88 वर्षो के बाद दूसरे जेल मैनुअल 2012 की स्वीकृति राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई है।
उन्होंने कहा कि नये जेल मैनुअल में जेलों को सुधार के केन्द्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।
इसके तहत एक पद पुलिस उप महानिरीक्षक कारा सुधार सेवा का सृजित किया गया है जो जेल में सुधार का काम देखेंगे। कारा महानिरीक्षक ने कहा कि नये मैनुअल के अनुसार जेल में जेलर के स्थान पर उपाधीक्षक का पद होगा और सहायक जेलर को अब सहायक अधीक्षक कहा जायेगा।
उन्होंने कहा कि जेल में सभी कार्य अब कम्प्यूटर के माध्यम से किए जाएंगे और सभी कैदियों का पूरा डाटा रखा जायेगा जिसमें उनके आवाज का नमूना भी होगा। किशोर ने कहा कि 18 से 21 वर्ष के कैदियों के लिये सभी जेलों में अलग से वार्ड रहेगा और इनमें सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे। इन कैमरों में कैदियों की गतिविधियों को रिकार्ड किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि न्यायालय में कैदियों का उपस्थापन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराया जायेगा। जिलों में जिलाधिकारी दो माह में एक बार बंदी दरबार लगायेंगे। सभी बंदियों को हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जायेगा। जेल में आने के साथ ही सभी कैदियों को उनके अधिकार की जानकारी दे दी जायेगी। उन्होंने कहा कि कैदियों से मिलने आने वालों का डाटा भी बनाया जायेगा और उनका फिंगर प्रिंट भी लिया जायेगा।