दिल्ली गैंगरेप के बाद देश में जोर पकड़ रहे दुष्कर्म विरोधी कड़े से कड़े की मांग के साथ सुर में सुर मिलाते हुए कांग्रेस ने वर्मा समिति को अपनी राय सौंप दी है। बलात्कार के दोषी की सजा बढ़ाने की मांग हो या फिर किशोर की परिभाषा बदलने की बात कांग्रेस ने वर्मा समिति से बेहद कड़ा कानून बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई ऐसी करतूत करने की हिम्मत न कर सके।
सरकार ने दुष्कर्म निरोधी कानून में संशोधन के लिए वर्मा समिति का गठन किया है। सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को कड़े कानून बनाने के सिलसिले में अपनी राय समिति को देने के लिए कहा था। इसी क्रम में कांग्रेस ने वर्मा समिति को तीन दिन पहले अपनी राय भेजी। कांग्रेस ने अपनी राय के बारे में बताने से इंकार किया है। पार्टी नेता पीसी चाको ने कहा कि पार्टी बेवजह किसी विवाद में पड़ना नहीं चाहती। इसलिए अपनी राय सार्वजनिक न करने का फैसला किया गया है। चाको ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि इस मामले में वर्मा समिति जल्द कड़े कानून के साथ अपना निष्कर्ष दे। इसलिए वह अपनी राय का खुलासा नहीं करेगी।
पार्टी ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी कार्रवाई के पक्ष में है, जिनके खिलाफ बलात्कार से संबंधित मामले चल रहे हैं। मगर पार्टी के सूत्र इस दिशा में अपराध की प्रकृति पर ध्यान देने की बात कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में फर्जी आरोप लगाकर फंसाने की कोशिश भी की जा सकती है। इसलिए संशोधित कानून में सतर्कता के प्रावधान जोड़ना जरूरी है।