कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित का मानना है कि नाबालिग होने की उम्र कम करने का फैसला लेने से पहले सरकार को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। नाबालिग की उम्र की सीमा 18 से घटाकर 16 साल करने पर केंद्र व राज्यों के बीच लगभग बन चुकी सहमति के बीच दीक्षित ने कहा कि इस फैसले के काफी दूरगामी परिणाम होने वाले हैं। लिहाजा वह इस मुद्दे पर हताशा या जल्दबाजी में फैसले लिए जाने के पक्ष में नहीं हैं।
सोमवार को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से मुलाकात के बाद दीक्षित ने अपनी दलील पेश की। हालांकि उनकी शिंदे से इस मुद्दे पर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। लेकिन दीक्षित का तर्क है कि कानून में जटिलता होने की वजह से शातिर अपराधी नाबालिगों को अपराध में शामिल कर रहे हैं। ऐसे में उम्र कम करने के फैसले से समाज में उलटा असर पड़ेगा। दीक्षित ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के सैकड़ों लोगों से बातचीत कर अपनी राय बनाई है। वह इसे जस्टिस वर्मा कमेटी और उषा मेहरा कमीशन के सामने पेश करेंगे।
दिल्ली में चलती बस में दरिंदगी का शिकार हुई लड़की के दोस्त के बयानों में दिल्ली पुलिस की शिकायतों पर दीक्षित ने कहा कि बलात्कार की वजहों पर काम कर रहा उषा मेहरा आयोग उस लड़के के बयान पर संज्ञान जरूर लेगा। गौरतलब है कि युवती के दोस्त ने अपने बयान में कहा है कि घटना वाले दिन उन्हें अस्पताल पहुंचाने के बजाय दिल्ली पुलिस आधे घंटे तक इलाके को लेकर ही बहस करती रही थी। इसके अलावा खुद घायल होने के बावजूद दोस्त ने ही बेसुध पड़ी युवती को गाड़ी में लिटाया था, जबकि पुलिसकर्मियों ने कोई मदद नहीं की थी। उधर, गृह मंत्रालय ने भी लड़के के आरोप की जांच के लिए एक संयुक्त सचिव को नियुक्त किया है।