भाजपा में पितृपुरुष का दर्जा प्राप्त वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मथुरा रैली का न्योता नहीं दिया गया।
25 मई को होने वाली रैली के में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आंमत्रित किया गया है, जबकि उन्होंने 6 सालों से किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया है। वह लकवे से ग्रस्त हैं और 2009 से ही अपने घर से बाहर नहीं निकले।
इसी वर्ष उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति प्रणब मूखर्जी ने उनके घर जाकर उन्हें सम्मानित किया था। हालांकि उस कार्यक्रम की जो तस्वीरें सार्वजनिक की गई थीं, उनमें भी अटल बिहारी वाजपेयी को चेहरा नहीं दिख पाया था।
मथुरा में कार्यक्रम आयोजन दीनदयाल उपाध्याय जन्मभूमि संपर्क समिति ने किया है।
वाजपेयी को बुलाने पर समिति की सफाई
25 मई को होने वाली रैली में आडवाणी को न बुलाने की संबंध में आयोजन समिति का कहना है कि दरअसल आडवाणी समिति के कभी सदस्य नहीं रहे। इसलिए उन्हें न्योता नहीं दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मथुरा के नगला चंद्रभान गांव के दीनदयाल धाम में होना है।
समिति के सचिव रोशन लाल ने अटल बिहारी वाजपेयी को निमंत्रित किए जाने के बावत कहा,' हमें पता है कि खराब स्वास्थ्य के कारण वाजपेयीजी कार्यक्रम में आने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि उन्हें न्योता भेजा गया है क्योंकि वह हमारी समिति के पहले अध्यक्ष हैं और आज तक इसके सरंक्षक हैं।'
2002 में आडवाणी जा चुके हैं दीनदयाल धाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समिति के सदस्य नहीं हैं, फिर उन्हें क्यों बुलाया गया है? इस सवाल के जवाब में रोशन लाल ने कहा कि मोदी कार्यक्रम में मोदीजी का स्वागत किया जाना है और वो यहां पार्टी की रैली को संबोधित करने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीनदयाल धाम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और कमेटी के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी भी 2001 में दीनदयाल धाम को दौरा कर चुके हैं। उस समय उन्होंने संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना लांच की थी। 2002 में आडवाणी भी दीनदयाल धाम की यात्रा कर चुके हैं।