'आपने कांग्रेस को 60 वर्ष दिए, मुझे 60 महीने दीजिए।' लोकसभा चुनाव में ये बयान किस नेता ने दिया था?
ये सवाल राजनीति के किसी छात्र से पूछा जाए, और जवाब में बहुविकल्प हों तो संभवतः विकल्प देखें बिना ही जवाब दे दिया जाएगा- नरेंद्र मोदी। लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणें में ये 'जुमला' कई दफा बोला। जुमले का असर 16 मई को ईवीएम से निकले नतीजों में दिखा। 31 फीसदी वोट और 282 सीटें। 1984 के बाद किसी पार्टी ने बहुमत हासिल किया। मतदाताओं ने मोदी को 60 महीने दिए।
हालांकि उन 60 महीनों में 12 महीने बीत गए, बचे मात्र 48 महीने। नरेंद्र मोदी के वादों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, उपलब्धियां गिनती भर।
ये जरूर है कि घरेलू स्तर पर चुनिंदा उपलब्धियों के बाद भी मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही बटोरने में कामयाब रहे। फोर्ब्स डॉट कॉम पर बिजनेस कॉलमनिस्ट कैनेथ रैपोजा ने मोदी सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल पर लिखा, एक वर्ष बाद मोदी के नेतृत्व में भारत बेहतर शक्ल में है। बाजार के रूप में मुल्क सही रास्ते पर है। स्थूल स्तर पर आर्थिक हालात में सुधार है।
जनधन योजना की तारीफ मोदी विदेश में भी कर आए
मोदी कांग्रेस पर ये आरोप लगाने से कभी नहीं चूकते कि जिन्होंने 60 साल कुछ नहीं किया, वे मेरा रिपोर्ट कार्ड मांगते हैं। इसके बाद भी मोदी का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का प्रयास किया जाए तो जनधन योजना को राजग सरकार के 12 महीनों की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।
जनधन योजन दरअसल वित्तीय समावेशन की एक योजना है। प्रधानमंत्री ने योजना की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले के प्राचीर से की थी। औपचारिक रूप से योजना की शुरुआत 28 अगस्त को हुई।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, पहले दिन ही जनधन योजना के तहत विभिन्न बैंकों ने डेढ़ करोड़ खाते खोल दिए थे। प्रधानमंत्री जनधन योजना की वेबसाइट के अनुसार 28 जनवरी तक 12.58 करोड़ खाते खोले जा चुके थे, जिनमें लगभग 10590 करोड़ रुपए जमा हो चुके थे।
कांग्रेस का दावा, रिपैकेजिंग भर है जनधन योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनधन योजना की सफलता का जिक्र अमेरिका के मैडिसन स्क्वेयर से लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान तक कर चुके हैं। हालांकि विश्लेषक यहां भी कमियां गिनाने से नहीं चूकते हैं।
जनधन योजना के तहत शून्य बैलेंस पर खाते खोले जाते हैं। खाताधारकों को रुपे डेबिट कार्ड और एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा दिया जाता है। योजना के तहत 5000 रुपए तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी है। योजना के आलोचकों का कहना है कि ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधाओं की कई शर्तें हैं, लेकिन सरकार उन्हें विज्ञापनों में नहीं दिखाती। बगैर कागजात के महज रुपे कार्ड के आधार पर दुर्घटना बीमा का दावा भी संभव नहीं है, लेकिन सरकार ये बताती नहीं है।
कांग्रेस का भी आरोप रहा है कि वित्तीय समावेशन की योजना उसी के कार्यकाल में शुरु की गई थी, मोदी सरकार ने उसमें कुछ नया नहीं जोड़ा है।
मोदी की विदेश यात्राओं की तारीफ आलोचक भी करते हैं
टाइम पत्रिका ने अपने ताजा अंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगला ग्लोबल खिलाड़ी बताया है। टाइम की प्रशंसा के व्यापक मायने हैं। नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर चुके हैं। बीते एक वर्ष में उन्होंने कूटनीति के नए प्रतिमान तैयार किए हैं।
बतौर अंतरराष्ट्रीय नेता नरेंद्र मोदी पारंपरिक राजनेताओं से अलहदा हैं। वे अमेरिकी राष्ट्रपति को ‘मिस्टर प्रेसिडेंट’ के बजाय ‘बराक’ कहने की क्षमता रखते हैं। महज राजदूतों और दूतावास के कर्मचारियों तक सिमटी विदेश नीति फिलहाल अपने दायरे तोड़कर ‘पीपल टू पीपल कॉन्टेक्ट’ की ओर बढ़ चली है।
मोदी नए किस्म की डिप्लोमेसी के सबसे बड़े खिलाड़ी बनर उभरे हैं। उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप की यात्राओं में राजनयिकों और राजधानियों तक सीमित रहने के बजाय आम जनता से संपर्क किया है। ये दीगर बात है कि विदेशों में मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाला बड़ा हिस्सा भारतवंशियों का रहा है और आयोजक भी वहीं रहे; फिर भी उन कार्यक्रमों ने स्थानीय लोगों और मीडिया में सुगबुगाहट जरूर पैदा की है।
भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अहम भूमिका में
मोदी ने बाहरी नेताओं को भी भारत की जनता से सीधा संपर्क करने का मौका दिया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मोदी के साथ 'मन की बात' कार्यक्रम में शामिल रहे थे। उन्होंने दिल्ली में भाषण भी दिया।
मोदी अब तक 16 विदेश यात्राओं में 30 मुल्कों का दौरा कर चुके हैं। 26 मई से पहले ही वह चीन, दक्षिण कोरिया और मंगोलिया का दौरा पूरा कर लेंगे।
मोदी की अत्यधिक विदेश यात्राओं की आलोचना भी होती रही है, हालांकि जानकारों का मानना है कि मोदी ने ऐसे में समय में विदेशों का दौरा किया, जब भारत को इसकी बहुत आवश्यकता थी; बीते 10 सालों में विदेश नीति के मसले पर यूपीए सरकार के उपेक्षपूर्ण रवैये के कारण भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा था।
मोदी की विदेश यात्राओं के कारण भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अहम भूमिका में आ गया है।
यमन संकट में मोदी सरकार की तारीफ विदेशों में भी हुई
गृहयुद्ध से घिरे यमन से भारतीय नागरिकों को निकालकर नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में काफी तारीफ पाई।
मार्च के अंतिम और अप्रैल के पहले सप्ताह के दरमयान सरकार ने 4000 भारतीय नागरिकों को वहां से देश वापस लाया था। संकट के उस दौर में भारत ने अमेरिका समेत 26 अन्य मुल्कों के नागरिकों को निकालने में भी मदद की थी।
ऑपरेशन राहत में भारत सरकार ने पाकिस्तान की भी मदद ली थी। यमन संकट के दरम्यान ऑपरेशन राहत को शानदार तरीके से संचालित करने के कारण विदेश राज्यमंत्री और पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह की सराहना हुई।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने यमन से अपने नागरिकों को निकालने के कामयाब रहा था, लेकिन संकट के उस दौर में भारत की प्रतिक्रिया बहुत ही धीमी रही।
सउदी अरब ने 26 मार्च को यमन में हवाई हमले शुरू किए थे। चीन ने 31 मार्च तक अपने नागरिकों को बाहर निकाल लिया, जबकि भारत सरकार तब तक ये ही नहीं तय कर पाई थी कि क्या और कैसे करना है।
सरकार ने लोकसभा में पास कराया जीएसटी बिल
राजग सरकार समेत कई अर्थशास्त्रियों का दावा है कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स आजाद भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण टैक्स सुधार है। बिल लोकसभा में पास हो चुका है, जबकि राज्यसभा में पेश भी नहीं हो पाया। बिल के रास्ते में आगे भी मुश्किले हैं।
बिल का राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक है। उसके बाद कम से 50 फीसदी राज्यों द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद ही यह अमल में आ पाएगा। केंद्र सरकार ने देश में नया टैक्स ढांचा लागू करने के लिए 1 अप्रैल, 2016 तक की समयसीमा निर्धारित कर रखी है, जीएसटी बिल पास हुए बिना ये संभव नहीं है।
फौरी तौर पर जीएसटी बिल को मोदी सरकार की उपलब्धियों के खाते में नहीं रखा जा सकता है। हालांकि बहुमत होने कारण सरकार इसे लोकसभा में पास कराने में कामयाब रही है, इसलिए इसकी पीठ जरूर थपथपाई जा सकती है।
2007-08 के बजट में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने एक अप्रैल, 2010 तक जीएसटी की क्रियान्यवन का लक्ष्य रखा था। वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया, मोदी सरकार पुराने बिल में कुछ सुधार कर नया बिल ले आई है।
वित्तीय एजेंसियां भी हुईं मोदी सरकार की मुरीद
यूपीए सरकार सतत कोशिश करती रही कि आर्थिक सुधारों को गति देकर पॉलिसी पैरालिसिस के आरोप को झुठला दे, क्रेडिट एजेंसियों के कठोर रवैये के कारण वह ऐसा कर नहीं पाई।
मूडीज, एसएंडपी और फिच जैसी ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने आम तौर पर उसे नकारात्मक रेटिंग दी। मुल्क में उद्योग और व्यापार का माहौल बेहतर करने के लिए मोदी सरकार में जो फैसले लिया, उनका नतीजा यह रहा है कि अप्रैल महीने में मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग स्टेबल से पॉजिटिव कर दी।
रायटर्स से बातचीत में एजेंसी की रेटिंग एनालिस्ट अतिशी सेठ ने कहा था कि भारत में व्यापार का माहौल अगले 12-13 महीने में सुधरा तो क्रेडिट रेटिंग भी सुधरेगी।
एसएंडपी और फिच ने अब भी भारत की रेटिंग स्टेबल रखी हुई है। विशेषज्ञ इसे निचले स्तर की रेटिंग मानते हैं।
मोदी सरकार ने शुरु की सामाजिक सुरक्षा की कई योजनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह समाजिक सुरक्षा की दृष्टि से तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की। ये तीन योजनाएं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजनाए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना हैं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 330 रुपए के सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपए का बीमा मिलेगा। 18 से 50 साल के लोगों के लिए यह योजना है। किसी वजह से मौत होने पर दो लाख रुपए परिवार को दिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एक प्रकार की दुर्घटना बीमा है, जिसके तहत 12 रुपए के सालाना प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा होगा। योजना 18 से 70 साल के लोगों के लिए है। दुर्घटना में मौत होने या हादसे में दोनों आंखें या दोनों हाथ या दोनों पैर खराब होने पर दो लाख रुपए मिलेंगे।
अटल पेंशन योजना 18 से 40 साल के लोगों के लिए है। जो किसी भी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना का हिस्सा नहीं हैं उन्हें इसका लाभ मिलेगा। योजना में 60 साल की उम्र में 1000 से 5000 रुपए की पेंशन मिलेगी और 42 से 210 रुपए का मासिक प्रीमियम देना होग।
यहां ये जोड़ना महत्वपूर्ण होगा कि ये सभी योजनाएं भर हैं, जनता को इसका कितना लाभ होगा, ये समय के साथ ही पता चल पाएगा। सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं यूपीए के कार्यकाल में भी रह हैं, जो आज तक जारी हैं।
केंद सरकार ने बेहतर किए राज्यों के साथ रिश्ते
मोदी सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बीते एक सालों में राज्यों के साथ मधुर रिश्ते भी रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं ही राज्यों को कई महत्वपूर्ण मामलों में अधिकार देने के लिए पहल की। मौजूद वित्तीय वर्ष के बजट में भी राज्यों को अधिक धन दिया गया।