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उत्तराखंड में मुंह खोलने को तैयार तबाही का एक और दानव

Mon, 15 Jul 2013 12:11 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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उत्तराखंड में भीषण तबाही का एक और दानव कभी भी अपना मुंह खोल सकता है।
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केंद्र सरकार के हैदराबाद स्थित नेशनल जियोफिजीकल रिसर्च इंस्टीच्यूट (एनडीआरआई) ने चार साल के शोध के बाद यह नतीजा निकाला है कि उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में आठ रिक्टर स्केल से ऊपर की तीव्रता वाले भूकंप का गंभीर खतरा है।

एनडीआरआई ने अपनी रिपोर्ट में भूकंप से टिहरी जैसे डैमों को गंभीर नुकसान होने और इससे होने वाले भयानक तबाही के प्रति भी आगाह किया है, लेकिन सरकारी संस्था की इस अहम रिपोर्ट के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को भनक तक नहीं।
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एनडीएमए के उपाध्यक्ष शशिधर रेड्डी ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें इस रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

विज्ञान एवं तकनीक विभाग के 9 करोड़ के फंड से कुमाऊं और गढ़वाल में किए गए इस शोध में एनडीआरआई ने अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की मदद भी ली है। दोनों संस्थाओं की रिपोर्ट रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।

एनडीआरआई के मुख्य शोधकर्ता डॉ. एसएस राय ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि कुमाऊं और गढ़वाल में आठ रिक्टर तीव्रता के भूकंप के साफ संकेत हैं। ऐसा भूकंप इस इलाके में 1803 में आया था, जिसका असर लखनऊ तक देखा गया था।

राय के मुताबिक सभी को यह मालूम है कि उत्तराखंड के टिहरी और अन्य डैम आठ तीव्रता वाले भूकंप का झटका नहीं सह पाएंगे। ऐसे में तबाही का अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है। राय के मुताबिक यह रिपोर्ट जारी कर दी गई है और इसे कोई भी हासिल कर सकता है।
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राय ने कहा कि उनका काम सिर्फ रिपोर्ट देना है। सरकार उस पर क्या कदम उठाती है यह उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट जारी होने के बाद विश्व की कई संस्थाओं ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन सरकार की ओर से उनसे अब तक इस बारे में कुछ भी नहीं पूछा गया है।
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