उत्तराखंड आपदा के शिकार गांवों को गोद लेने और वहां ढांचागत सुविधाएं फिर से बहाल करने के लिए अब सरकारी तेल कंपनियों ने आगे आने का फैसला किया है।
पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के निर्देश पर तेल कंपनियों ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में मदद के लिए 12 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराए हैं। साथ ही उन्होंने गांवों को गोद लेने की इच्छा जाहिर की है।
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पेट्रोलियम मंत्री ने तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक कर उनसे बचाव अभियान में विशेष मदद देने को कहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के क्षतिग्रस्त इलाकों में ईंधन पहुंचाने के साथ-साथ उन जगहों पर मदद और पुनर्वास की व्यवस्था भी तेल कंपनियों की प्राथमिकता में होनी चाहिए।
हालांकि तेल कंपनियां कितने गांवों को गोद लेगी इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है, लेकिन राज्य सरकार और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से सलाह मशविरा के बाद जल्द ही स्मारकों की मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।
मदद देंगी सरकारी बिजली कंपनियां
उत्तराखंड में तबाह हो चुके बुनियादी ढांचे को फिर से स्थापित करने के लिए सरकारी बिजली कंपनियां भी मदद करेगी। इसके लिए नौ सरकारी उपक्रमों ने साझा तौर पर 25 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया है।
केंद्रीय विद्युत राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया। इसमें एनटीपीसी सबसे ज्यादा 10 करोड़ रुपये की मदद करेगी।
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इसके अलावा पावर ग्रिड, एनएचपीसी, टिहरी जल विद्युत निगम, सतलुज जल विद्युत निगम, पीएफसी, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम, दामोदर घाटी निगम और नार्थ ईस्ट इलेक्ट्रिक पॉवर कॉरपोरेशन भी मदद देने को तैयार हैं।
बैठक में इन उपक्रमों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय विद्युत सचिव पी. उमाशंकर और कई अन्य आला अफसर मौजूद थे।