उत्तराखंड में आए जल सैलाब में गंगा में बहे शवों से महामारी फैलने के खतरे से बचाव के कदम उठाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र, उत्तराखंड सरकार से जवाब तलब किया है।
याचिका में कहा गया है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही महामारी से बचाव के कदम उठाए जाने चाहिए क्योंकि उत्तराखंड में भूस्खलन, बाढ़ और भारी बारिश के दौरान तमाम शव मलबे में दब गए और कई नदी में बह गए, जिनके सड़ने से महामारी फैल सकती है।
जस्टिस एके पटनायक व जस्टिस एमवाई इकबाल की पीठ ने स्वामी अच्युतानंद तीरथ सहित अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से भी जवाब तलब किया है क्योंकि याचिका में बाढ़ ग्रस्त राज्यों में आपदा प्रबंधन के कोई प्रबंध न होने का कथित आरोप लगाया गया है।
पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अनुराग तोमर ने तर्क दिया कि सैकड़ों की संख्या में मलबे के भीतर शव दब गए, जिन पर से मिट्टी की पर्त हटने पर इन शवों से महामारी फैल सकती है।
इसके बचाव के लिए प्राधिकारों की ओर से कोई प्रभावी कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। ऐसी स्थिति में पीठ से गुजारिश है कि राज्य सरकारों को बचाव के संबंध में कदम उठाने का निर्देश जारी करे।
अधिवक्ता तोमर ने पीठ को बताया कि बाढ़ ग्रस्त राज्यों में आपदा प्रबंधन का बुरा हाल है। ऐसे में यह जरूरी है कि इन राज्यों को आपदा के प्रति सचेत करने का निर्देश अदालत जारी करे।
पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए यूपी, दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया।
याचिका के मुताबिक इन क्षेत्रों में भी गंगा के तेज बहाव में शव बहकर आ सकते हैं जिनके सड़ने के परिणामस्वरूप नदी के आसपास के जिले में महामारी फैलने का खतरा है।
याचिका में दिल्ली सरकार को कांवड़ियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की गई है, जिस पर अदालत ने जवाब तलब भी किया है।
गौरतलब है कि याचिका में दावा किया गया है कि उत्तराखंड व अन्य सरकारों की ओर से महामारी के बचाव को लेकर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।