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राहुल दरबार पहुंची उत्तराखंड कांग्रेस की खींचतान

Tue, 19 Mar 2013 12:24 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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गुटों में बंटी उत्तराखंड कांग्रेस की खींचतान अब पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गाधी के दरबार में भी पहुंच गई है। संसद भवन परिसर में राहुल के साथ पार्टी सांसदों ने प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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आगामी लोकसभा चुनाव व प्रदेश के मुद्दों पर संवाद कर रहे राहुल से प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य को बदलने की मांग पुरजोर तरीके से की गई। राहुल ने लगभग पौन घंटे तक उत्तराखंड के सांसदों के विचार सुने।

प्रदेश कांग्रेस के लिए नया अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग को लेकर सबसे ज्यादा मुखर गढ़वाल क्षेत्र से सांसद सतपाल महाराज थे। वे खुद भी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं।
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अल्मोड़ा क्षेत्र के सांसद प्रदीप टमटा ने भी अप्रत्यक्ष तौर पर महराज की मांग में हां में हां मिला दी। महाराज ने राहुल से यह भी कहा कि सरकार और संगठन में तालमेल की कमी है, इसके लिए एक समन्वय समिति गठित करने की आवश्यकता है।

महाराज ने अमर उजाला से कहा कि उन्होंने केंद्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए निगरानी समिति गठित करने की मांग इसलिए की, ताकि इन योजनाओं पर ठीक से अमल हो सके।

प्रदेश अध्यक्ष को लेकर महाराज ने यह भी कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगी वे लेने को तैयार हैं।

बहरहाल, कांग्रेस सांसदों ने राहुल से कहा कि सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल होने व सभी के एकजुट होने पर आगामी लोकसभा चुनाव में 2009 का इतिहास दोहराया जा सकता है।

तब कांग्रेस ने उत्तराखंड की सभी पांचों सीटें जीत लीं थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस की हालात बेहत खराब है। बैठक में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत, केसी सिंह बावा व महेंद्र माहरा भी शामिल हुए।

बैठक में बहुगुणा सरकार पर लग रहे भूमि की खरोद-फरोख्त संबंधी आरोपों का भी जिक्र किया गया। बहरहाल, प्रदेश अध्यक्ष का विवाद राहुल दरबार पहुंचने से अब उत्तराखंड कांग्रेस में खींचतान और तेज होने की आशंका है।

एक साल पहले विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की मांग होती रही है। हरीश रावत खेमा प्रदीप टमटा को संगठन की कमान सौंपने की मांग करता रहा है, जबकि बहुगुणा और महाराज हाल तक आर्य के पक्ष में रहे है, लेकिन अब महाराज भी खुद प्रदेश अध्यक्ष बनने की इच्छा जता चुके हैं। अब राहुल से यह मांग कर उन्होंने इस विवाद की चिनगारी सुलगा दी है।
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