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‘पैसे लेकर अमेरिका दे रहा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को रैकिंग’

Mon, 23 Sep 2013 11:10 AM IST
अमर उजाला, कानपुर
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दुनियाभर के शैक्षिक संस्थानों को रैंक देने वाली अमेरिका की द टाइम्स एजेंसी पर आईआईटी कानपुर प्रशासन ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन प्रो. एम आनंद कृष्णन और निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने एजेंसी द्वारा हाल ही में आईआईटी को दी गई 295 रैंक को गलत बताते हुए एजेंसी पर ‘रैकिंग बिजनेस’ करने का आरोप लगाया है।

पायनियर बैच हॉल में बातचीत में प्रोफेसर एम आनंद कृष्णन और प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यूएस रैंकिंग के पीछे पैसे का ‘खेल’ है।

उन्होंने कहा कि अगर कानपुर का कोई छोटा-मोटा शैक्षिक संस्थान ज्यादा पैसा दे दे तो उसे आईआईटी से बढ़िया रैंकिंग मिल सकती है। इसके विरोध में एजेंसी को पत्र भेजकर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
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पत्र में कहा गया है कि फैकल्टी, स्टूडेंट्स स्ट्रेंथ, रिसर्च, प्लेसमेंट सहित कई मामलों में आईआईटी कानपुर अच्छी रैंकिंग पाने वाली सिंगापुर, यूएस की यूनिवर्सिटियों से कहीं आगे है।

टॉप 200 में चीन के 50 शैक्षिक संस्थान शामिल किए हैं, जो किसी हाल में संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग के दौरान यूएस एजेंसी ने आईआईटी कानपुर के 28 एक्सपर्ट का नाम पैनल में शामिल किया था, जिसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि रैंकिंग का कोई खास असर आईआईटी पर नहीं पड़ा है।
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आईआईटी में पढ़ाएंगे विदेशी गुरुजी

आईआईटी कानपुर ने फैकल्टी रिक्रूटमेंट का प्रॉसेस तेज कर दिया है। इस बार अमेरिका सहित अन्य देशों की यूनिवर्सिटियों में पढ़ाने वाली फैकल्टी को नियुक्ति देने पर जोर ज्यादा है। अब तक 14 फैकल्टी ज्वाइन कर चुकी हैं जबकि 14 जल्द रिपोर्ट करेगी। फैकल्टी को बढ़िया सैलरी देने के लिए एलुयमिनाई ने तीन लाख डॉलर फंड देने का भरोसा दिलाया है।
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