इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होकर स्वदेश लौटे आरिफ मजीद से अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी पूछताछ कर सकती हैं।
इन एजेंसियों का मानना है कि आतंक मचा रहे इस आतंकी गुट के बारे में मजीद काफी जानकारियां मुहैया करा सकता है। अमेरिका आईएस के खिलाफ हवाई हमलों को अंजाम दे रहा है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अमेरिका आतंकी गुट के क्रियाकलापों के बारे में जानने को उत्सुक है और आरिफ आतंकी गुट के कब्जे वाले स्थानों की जमीनी हालात की जानकारी दे सकता है।
जांचकर्ताओं को पूछताछ के दौरान आरिफ ने बताया कि सिविल इंजीनियर होने के कारण आईएस ने उसकी तैनाती मोसुल बांध (डैम) में की थी क्योंकि वहां पर कार्यरत लोग आईएस के निर्देशों पर काम कर रहे थे। बांध पर काम करने के दौरान एक हवाई हमले में आरिफ घायल हो गया था।
यह इराक का सबसे लंबा बांध है और यह तिगरिस नदी पर बना है। जुलाई और अगस्त के कई हफ्तों तक इस बांध पर आईएस का कब्जा रहा। 17 अगस्त को कुर्द और इराकी सेना ने हमला बोलकर बांध को आईएस के चंगुल से मुक्त करा लिया था। कुर्द और इराकी सेना की मदद के लिए अमेरिका ने हवाई हमले किए थे।
आईएस के बारे में जानकारी की उम्मीद
मोसुल बांध पर काम करने के बाद आरिफ सीरियाई कस्बे राक्का या अर-रक्काह चला गया था। यह कस्बा अभी भी आईएस के कब्जे में है। यहीं पर आरिफ को एके 47 राइफल थमाई गई लेकिन वह परीक्षण के दौरान जख्मी हो गया।
पूछताछ के दौरान आरिफ ने बताया कि उसके और कल्याण के तीन अन्य युवकों के अलावा वहां पर एक और भारतीय मूल का युवक था। वह भी आईएस के लिए काम कर रहा था। वह युवक खाड़ी के किसी देश से आया था।
सूत्रों के अनुसार, आरिफ को आईएस के लिए जंग लड़ने के लिए इराक सीरिया जाने का कोई पछतावा नहीं है लेकिन वह घर बस परिवार के दबाव में वापस आया है। उसने इसे अपनी गलती बताया है।
हालांकि उसने कहा कि उसे इसका दुख है कि उसे लड़ाई में भेजने की जगह शौचालय साफ कराया गया। उसने बताया कि कल्याण के तीन अन्य युवकों को अलग-अलग जगहों पर रखा गया है। उसने उनकी जगहों की जानकारी भी दी है।
आरिफ का दावा है कि वे जंग का हिस्सा नहीं है लेकिन उन्हें आईएस आतंकियों के लिए खाना बनाने जैसे काम दिए गए हैं। आरिफ ने बताया कि आईएस आतंकी भारतीय युवकों को जंग के काबिल नहीं समझते हैं।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी आरिफ का नार्को टेस्ट कराना चाहती है लेकिन यह आरिफ की सहमति मिलने के बाद ही होगा। आरिफ से उसके परिजनों को मिलने की अनुमति है और उसे हिरासत में घर का बना खाना मिल रहा है।
आरिफ की ब्रेन मैपिंग कराएगी एनआईए
राष्ट्रीय सुरक्षा जांच एजेंसी (एनआईए) नार्को से पहले आरिफ का ब्रेन मैपिंग टेस्ट करना चाहती है। समझा जा रहा है कि इसलिए एनआईए ने सोमवार को इस संबंध में कोर्ट में कोई अप्लीकेशन नहीं दी। जल्द ही आरिफ का किसी साइकॉलोजिस्ट के सामने बैठाकर मानसिक परीक्षण कराया जाएगा।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब आरिफ की उसके पिता डॉ. एजाज माजिद से मुलाकात कराई जाती है तो उसके मन में पश्चाताप का कोई भाव नहीं दिखाई देता। पूछताछ के दौरान उसकी हरकतें बावला जैसी होती हैं, इसलिए एनआईए उसकी ब्रेनमैपिंग करना चाहती हैं।
उधर पुलिस सूत्रों के अनुसार आरिफ ने कई ऐसे लोगों के नाम का खुलासा किया है, जिन्होंने इराक भेजने में उसकी मदद की थी। उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे, क्योंकि इससे जांच पर असर पड़ेगा। पुलिस रिकार्ड के अनुसार महाराष्ट्र में पिछले कुछ सालों में 18 से 25 साल के कई युवा लापता हुए हैं।
इस संबंध में भी आरिफ से पूछताछ में एनआईए को कुछ अहम सुराग मिले हैं। एनआईए ने हर पहलू पर अपनी जांच केंद्रित कर रखी है। सूत्रों ने बताया कि आरिफ माजिद जिस कॉलेज में पढ़ता था, उसके एक प्रोफेसर से भी सोमवार को पूछताछ की गई।
जानकारी के मुताबिक आरिफ इराक जाने से पहले नई मुंबई के पनवेल स्थित कालशेखर कालेज में इंजीनियरिंग तृतीय वर्ष का छात्र था। सूत्रों का कहना है कि एनआईए ने इस कॉलेज के एक प्रोफेसर को आमने-सामने बिठा कर पूछताछ भी की है।
आतंकवादी निरोधी दस्ता (एटीएस) भी पहले कालेज के प्रिंसिपल और दो प्रोफेसरों से पूछताछ कर चुका है। प्रोफेसर से पूछताछ के अलावा एनआईए ने उन 43 लड़कों की भी जानकारी जुटा रही है, जिसे आरिफ अपने साथ इराक ले जाना चाहता था।