क्या भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की राह में हिंदी रोड़ा बन रही है? बीते कुछ बरसों के उसके नतीजों को देखें तो ऐसा ही लगता है।
यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है कि सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस) की पहली सीढ़ी यानी प्रारंभिक परीक्षा में हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या लगातार घट रही है।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की 62 वीं वार्षिक रिपोर्ट से यह खुलासा होता है, जिस पर गौर करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक 2009 की आईएएस प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले कुल 11,504 परीक्षार्थियों में से 4,861 हिंदी माध्यम के थे।
इसी तरह 2010 में मुख्य परीक्षा देने वाले कुल 11,859 में से 4,194 हिंदी के थे। लेकिन 2011 में सी-सैट लागू किए जाने के बाद हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों की मुश्किलें बढ़ने लगीं। मसलन, 2011 में मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले कुल 11,230 परीक्षार्थियों में से अंग्रेजी के 9,316 परीक्षार्थी थे और उसके मुकाबले हिंदी के सिर्फ 1,700 ही रह गए।
जानकारों की मानें तो हिंदी भाषी परीक्षार्थियों के नाकाम होने की वजह आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा के पैटर्न में किया गया बदलाव है।
हालांकि एक प्रदेश के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने अमर उजाला से कहा, 'तार्किक सोच और तथ्यों के आधार पर सुव्यवस्थित निर्णय लेने में समर्थ आईएएस अधिकारियों की खोज करने के लिए ही यूपीएससी ने आईएएस परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किए हैं। मगर इसके लिए जरूरी है कि इसकी शुरुआत स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम से होनी चाहिए।'
वजह जो भी हो, इसका खामियाजा फिलहाल हिंदी भाषी परीक्षार्थियों को उठाना पड़ रहा है। राष्ट्रभाषा हिंदी का रोना रोने वालों के लिए यह वाकई चिंता की बात होनी चाहिए।
आईएएस कोचिंग डिस्कवरी के डायरेक्टर (एकेडेमिक्स) सीबीपी श्रीवास्तव के मुताबिक शैक्षिक पृष्ठभूमि की वजह से हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों की अंग्रेजी उतनी अच्छी नहीं होती।
कॉम्प्रिहेंशन के सवालों को हल करने में उनकी यही कमी उनके आड़े आ जाती है। यूपीएससी को चाहिए कि वह कॉम्प्रिहेंशन के सवालों के हिंदी अनुवाद को सुधारे।
उल्लेखनीय है कि यूपीएससी ने अपने पैटर्न में बदलाव करते हुए प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब वैकल्पिक विषय के प्रश्नपत्र को हटाकर सी-सैट का पेपर रखा गया है, जिसमें पूछे जाने वाले 80 प्रश्नों में से लगभग आधे कॉम्प्रिहेंशन के होते हैं। हिंदी भाषियों के लिए यही अड़ंगा बन रहा है, क्योंकि इन प्रश्नों का हिंदी अनुवाद सरकारी हिंदी जैसा कर दिया जाता है।
सिहांता आईएएस के निदेशक रजनीश राज के मुताबिक कांप्रिहेंशन के जो प्रश्न अंग्रेजी और हिंदी दोनों में होते है, उन्हें अंग्रेजी के परीक्षार्थी तो झटपट हल कर देते हैं। जबकि इन प्रश्नों का हिंदी अनुवाद इतना क्लिष्ट होता है कि परीक्षा हॉल में उन्हें समझने में ही परीक्षार्थी के तकरीबन 10 मिनट नष्ट हो जाते हैं।
आखिर क्यों है सीसैट एक बाधा
सीसैट के पेपर में पूछे जाने वाले गद्यांश आधारित प्रश्नों की संख्या लगभग 40 होती है। इनमें से 8 सवाल अंग्रेजी कंप्रिहेंशन और लगभग 32 सवाल भारतीय भाषाओं में कॉम्प्रिहेंशन से आते हैं।
हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों को अगर अंग्रेजी के प्रश्नों में दिक्कत हो, तो समझ में आता है, लेकिन अगर उन्हें हिंदी कॉम्प्रिहेंशन के प्रश्नों में परेशानी हो, तो इसे आप क्या कहेंगे?लेकिन यह सच है।
दरअसल, इन सवालों में जो हिंदी गद्यांश दिए जाते हैं, वे अनुवादित होते हैं। यह सरकारी अनुवाद इतना जटिल होता है कि हिंदी के दिग्गजों के भी छक्के छूट जाएं। हिंदी के इन दुरूह शब्दों को समझने के लिए हिंदी भाषी परीक्षार्थियों को इन्हें अंग्रेजी में पढ़ना पड़ता है।
इससे परीक्षा हॉल में उनका कीमती समय नष्ट हो जाता है। अगर इस ओर जल्द से जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब हिंदी माध्यम के विद्यार्थी आईएएस की परीक्षा देना ही छोड़ देंगे।