रेल मंत्री पवन कुमार बंसल और कानून मंत्री अश्वनी कुमार के इस्तीफे पर अड़े विपक्ष के हंगामे के कारण खाद्य सुरक्षा बिल आज भी संसद में पेश नहीं हो पाया।
वहीं खाद्य सुरक्षा बिल पर वाम और तृणमूल कांग्रेस के समर्थन के वादे से सरकार को थोड़ी राहत जरूर मिली है। हालांकि सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि वो इस बिल पर सदन में चर्चा चाहते हैं और उनकी पार्टी इस बिल पर कुछ संशोधन भी पेश करना चाहती है।
आज जैसे ही सदन की कार्रवाई शुरू हुई विपक्षी दल के सदस्यों ने दोनों मंत्रियों के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। विपक्ष का कहना था कि जब तक दोनों मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, सदन में कामकाज नहीं होने दिया जाएगा।
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज पहले ही कह चुकी हैं कि जब तक दोनों मंत्री इस्तीफा नहीं देते तब तक सदन में कोई कामकाज नहीं होने दिया जाएगा।
सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार जबरदस्ती कोई भी बिल पास नहीं करा सकती।
इससे पहले समाजवादी पार्टी ने भी कड़ा रुख अपना लिया है और वो पहले ही कह चुकी है कि जब भी कांग्रेस के किसी मंत्री पर आरोप लगते हैं तो वह उन्हें बचाने का काम करती है। सपा ने भी दोनों मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है।
इस बीच कांग्रेस पार्टी ने खाद्य सुरक्षा विधेयक के लिए अपने सांसदों को ह्विप भी जारी कर दिया है।
संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ और उनके जूनियर राजीव शुक्ला ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा विधेयक को पारित कराने में अड़चन ख़ड़ी कर विपक्ष गरीबों के खिलाफ काम कर रहा है।
12 बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरु होने पर भाजपा सदस्यों ने फिर दोनों मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा शुरु कर दिया। लिहाजा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।
वहीं, राज्य सभा में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद जब बांग्लादेश से जमीन समझौता विधेयक पेश करने आए तो असम गण परिषद के सदस्यों ने उनसे बिल छीनने की कोशिश की। हंगामे के कारण राज्य सभा की कार्यवाही भी दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।