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सोशल साइट पर कुर्बानी के बकरे का फोटो लगाना नाजायज

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इन दिनों व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर, स्काइप, सामा, मैसेंजर, ईमो आदि सोशल नेटवर्किंग साइट पर लोग कुर्बानी के बकरों के फोटो डाल रहे हैं। जो इस्लाम में गैर शरई और रियाकारी (दिखावा) माना गया है। ऐसा करके वह अपनी कुर्बानी को नामुकम्मल (खंडित) करेंगे।
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इस मामले में फतवा भी है, इसमें कहा गया है कि इस्लाम में जिंदा चीजों का फोटो खींचना नाजायज है। वह चाहे इंसान हो या जानवर। फोटोग्राफी को हराम करार दिया गया है।

इसके बारे में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी की किताब ‘फतावा रजविया’ सहित कई दीगर किताबों में भी जिक्र मिलता है। इसमें उलमा भी अपनी राय में इसे नाजायज ही करार देते हैं।
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अगर इसमें दिखावा शामिल हो जाए तो कुर्बानी नहीं होगी

मौलाना डा. एजाज अंजुम, उस्ताद मदरसा मंजरे इस्लाम, दरगाह आला हजरत बरेली ने कहा कि कुर्बानी अल्लाह की रजा के लिए है। इसमें कोई दिखावा नहीं होता। इस तरह से कुर्बानी के जानवर का फोटो नेट पर उसकी कीमत के साथ फ्लैश करना इस्लाम ने दिखावा माना है। इससे बचना चाहिए और सिर्फ अल्लाह की रजा और नीयत होनी चाहिए।

हाफिज इमरान रजा बरकाती, प्रधानाचार्य मदरसा तालिमुल इस्लाम गरीब नवाज बिहार कलां, बरेली दिखावा इस्लाम में जायज नहीं है। जो बकरा कुर्बानी के लिए लाए हैं उसे जताना, दिखाना रियाकारी है। कुर्बानी सिर्फ लिल्लाहियत और अल्लाह की रजा के लिए है

कारी मोहम्मद अशराफ खां तहसीनी, प्रबंधक मदरसा जामे इस्लाम पदारतपुर बरेली कुर्बानी अल्लाह की रजा के लिए होती है। अगर इसमें दिखावा शामिल हो जाए तो कुर्बानी नहीं होगी। जो लोग भी नेटवर्किंग साइट पर जानवरों की नुमाइश कर रहे हैं वह नजायज है।
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