एनडीए का आकार बढ़ाने के भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रयासों को देखकर कांग्रेस के अंदर भी चिंतन और मंथन शुरू हो गया है।
यूपीए का कुनबा बढ़ाने की कोशिश में कांग्रेस के मैनेजर भी जुट गए हैं। लिहाजा, अपने तुरुप के मुद्दे धर्म निरपेक्षता के नाम पर साथियों की तलाश शुरू हो गई है।
इस क्रम में लेफ्ट, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रमुक, जद-यू, वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), बसपा और सपा समेत तमाम क्षेत्रीय दलों से तालमेल की संभावनाओं पर विचार विमर्श शुरू हो गया है।
कांग्रेस के मैनेजर मान रहे है कि मोदी की उम्मीदवारी के चलते यूपीए के कुनबे में धर्म निरपेक्षता के नाम पर दल जुड़ते चले जाएंगे।
अगले लोकसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की बात तय मानी जा रही है। इसलिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पहले ही इसके लिए बाकायदा रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में समिति बना दी है।
इस समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं। बैठकों में इसी बात पर आमराय बन रही है कि भरोसेमंद सहयोगियों के तौर पर वामदलों का कोई मुकाबला नहीं है। इसी सोच के चलते पार्टी वामदलों के सामने चारा फेंकती रहती है।
कांग्रेस प्रवक्ता पीसी चाको कहते हैं कि भले ही वामदलों के साथ कितने भी बिंदुओं पर मतभेद हो, मगर सांप्रदायिकता के नाम पर हमारे विचार एक हैं।
माकपा महासचिव प्रकाश करात हालांकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को समर्थन देने की बात से इंकार कर चुके हैं, लेकिन लेफ्ट के कई नेता अंदरखाने कांग्रेस को समर्थन देने के पक्ष में दिखते हैं। खासकर माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी का धड़ा कांग्रेस को समर्थन देने के पक्ष में है।
उधर, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर भी डोरे डालने की कोशिशें जारी हैं। पीएम हाल ही में ममता के साथ दुबारा गठजोड़ की संभावना जता चुके हैं।
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस से अलग हुए जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस से प्रदेश में चुनाव बाद गठजोड़ पर दोनों पार्टियों की बातचीत चल रही है।
राष्ट्रपति चुनाव में भी रेड्डी ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। तेलंगाना राष्ट्र समिति को भी साथ रखने की कोशिश हो रही है।
उत्तर प्रदेश में अभी सपा के खिलाफ पार्टी का कड़ा रुख है, लेकिन लोकसभा चुनाव बाद पार्टी के बाहर से समर्थन पर कांग्रेस को कोई ऐतराज नहीं है। बसपा से भी संबंध बढ़ाने के विकल्प भी खुले रखे गए हैं।
तमिलनाडु में द्रमुक के साथ पार्टी ने संबंध बनाए रखे हैं। जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक का रुख मोदी के पक्ष में सकारात्मक है।
लेकिन कांग्रेस के मैनेजरों को लगता है कि अगर वामदल साथ आते हैं तो वह जयललिता को मना सकते हैं। बिहार में चुनाव बाद गठबंधन को लेकर कांग्रेस ने नीतीश कुमार की जद-यू और लालू प्रसाद यादव की राजद दोनों को साध रखा है।