आंध्र प्रदेश की पार्टी मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमिन (एमआईएम) के केंद्र और आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा से यूपीए को झटका लगा है। भले ही एमआईएम का लोकसभा में एक ही सांसद हो मगर राजनीतिक मोर्चे पर संकट में खड़ी सरकार के लिए चुनौती बढ़ गई है। ममता बनर्जी के यूपीए सरकार से नाता तोड़ने के बाद झारखंड की बाबूलाल मरांडी की पार्टी भी समर्थन वापस ले चुकी है। अब एमआईएम के ऐलान से संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस पर सियासी दबाव बढ़ गया है।
एमआईएम ने आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में चार मीनार के आसपास एक धार्मिक ढांचे को लेकर राज्य सरकार के एक फैसले पर विरोध जताते हुए समर्थन वापस लिया है। एमआईएम के ऐलान पर कांग्रेस ने कहा है कि एमआईएम की राज्य विधानसभा और लोकसभा में ज्यादा हिस्सेदारी नहीं है, इसलिए उनकी सरकारों को कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि सरकार पर कोई संकट नहीं है।
दीक्षित ने कहा कि यूपीए सरकार के पास 280 सांसदों का समर्थन है और उसे इस बात की भी पूरी उम्मीद है कि वह शीतकालीन सत्र में आर्थिक सुधारों से जुड़े सभी विधेयकों को पारित करवा लेगी। शीतकालीन सत्र के संकट को खत्म करने के लिए कांग्रेस और यूपीए सरकार जी जान से जुटी हुई है। प्रधानमंत्री मुलायम सिंह यादव और मायावती समेत कई सहयोगी दलों को लंच और डिनर करवा चुके हैं। वहीं कांग्रेस के रणनीतिकार सपा और बसपा के अलावा बीजू जनता दल को भी साधने में जुटे हुए हैं।