कैग पर लगाम कसने को लेकर छिड़े विवाद की वजह से भले ही सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है, लेकिन शुंगलू समिति की सिफारिशों के आधार पर चुनाव आयोग की तरह कैग को भी बहुसदस्यीय बनाने के नारायणसामी के बयान को ही सरकार की असल योजना माना जा रहा है।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री नारायणसामी का बयान सरकार की मंशा है। वह कैग को चुनाव आयोग की तर्ज पर बहुसदस्यीय बनाना चाहती है। मगर सरकार के इरादों में संविधान संशोधन अड़ंगा बन सकता है, क्योंकि संवैधानिक संस्था कैग में अगर वह सदस्यों की संख्या बढ़ाना चाहती है तो इसके लिए उसे संसद में संविधान संशोधन पास कराना होगा। मगर लोकसभा और राज्यसभा में यूपीए के नंबरों का आंकड़ा इतना नहीं है कि वह बिना विपक्ष के सहयोग के संविधान संशोधन पास करा सके।
नारायणसामी की ओर से रविवार को एक इंटरव्यू में कहा गया था कि सरकार शुंगलू समिति की सिफारिश के आधार पर कैग को बहुसदस्यीय निकाय बनाने पर विचार कर रही है। इस बयान को लेकर विवाद छिड़ने के बाद सरकार और कांग्रेस बचाव में आ गई हैं। नारायणसामी भी अपनी बात से पलट गए हैं। वैसे सरकार और कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्र साफ संकेत दे रहे है कि सरकार शुंगलू समिति की सिफारिशों पर आगे बढ़ने के पक्ष में है।
सूचना और प्रसारण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनीष तिवारी ने नारायणसामी के बयान से गरमाई सियासत को थामने के दौरान सरकार के इस इरादे का साफ संकेत दिया। चुनाव आयोग को बहुसदस्यीय बनाए जाने के बाद इसकी सफलता का उदाहरण देते हुए तिवारी ने कैग को भी बहुसदस्यीय बनाने की पैरोकारी करने में हिचक नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के मामले में यह प्रयोग कामयाब रहा है।
यूपीए के भीतर माना जा रहा है कि इस योजना का समय से पहले खुलासा कर दरअसल नारायणसामी ने विवाद के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों को संसद के शीत सत्र से पहले एक मुद्दा दे दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के अलग होने के बाद संसद में नंबर गेम की कमजोर पिच को देखते हुए सरकार कम से कम शीत सत्र तक संबंधी अपने इरादे को आगे बढ़ाने से बचेगी।
गौरतलब है कि कैग को बहुसदस्यीय बनाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत है। मगर राज्यसभा में यूपीए सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। उसे विपक्ष के सहयोग की जरूरत है। भाजपा ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह सरकार के इस तरह के कदम का संसद के अंदर और बाहर विरोध करेगी।