यूपी में लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को लेकर मंगलवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। बीसपी सुप्रीमो मायावती और उनकी पार्टी के सदस्यों ने हंगामा किया और उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की बर्खास्तगी की मांग की।
इस हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। सभापति ने ये मामला बाद में उठाने को कहा लेकिन बीएसपी के सांसद नहीं माने और लगातार हंगामा करते रहे।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए जैसे ही मंगलवार को जैसे ही सदन की कार्रवाई शुरू हुई, सबसे पहले मायावती ने बदायूं रेप केस पर चर्चा की मांग की।
अखिलेश सरकार की बर्खास्तगी की मांग
सभापति हामिद अंसारी ने उन्हें समझाने की कोशिश करते हुए मामले को बहस के दौरान उठाने के लिए कहा। लेकिन बीएसपी अध्यक्ष मायावती मानने को तैयार नहीं हुई।
इस दौरान बसपा सांसद बहस को लेकर जमकर नारेबाजी करते रहे। हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई सुचारू ढंग से नहीं चल सकी।
सदन में बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर से बदायूं में दो नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के बाद पेड़ से लटका कर की गई उनकी हत्या की सीबीआई जांच की मांग की। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट तक मामला ले जाने की धमकी भी दी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार, बदायूं रेप केस जैसे मामलों को लेकर सपा सरकार विपक्ष के निशाने पर है। बीएसपी ने पहले भी इस मामले में अखिलेश सरकार के इस्तीफे की मांग की थी।
केंद्र की चुप्पी पर मायावती ने उठाए सवाल
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने बदायूं मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पहले से ही समाजवादी पार्टी के साथ थी और अब भारतीय जनता पार्टी भी उन्हें समर्थन दे रही है। इसीलिए एक भी केंद्रीय मंत्री ने इस मुद्दे पर यूपी सरकार के खिलाफ एक शब्द बोलने की जहमत नहीं उठाई।"
उन्होंने कहा, "मुझे पता चला है कि अब अखिलेश सरकार सीबीआई जांच के मूड में नहीं दिख रही। वो बदायूं मामले के आरोपियों को बचाना चाहती है।" इतना ही नहीं मायावती ने कहा कि बदायूं के पीड़ित परिवार को यूपी सरकार में न्याय मिलने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है।
बीएसपी अध्यक्ष ने यूपी सरकार को घेरते हुए राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यहां ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब बलात्कार और हत्या की कोई घटना नहीं हो।"