उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में वर्ष 2005 से 2011 के बीच हुए दस हजार करोड़ के एनआरएचएम घोटाले की सीबीआई जांच जारी है। घोटाले के खुलासे के बाद भले तत्कालीन मायावती सरकार के दो मंत्रियों परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्र ‘अंटू’ को इस्तीफा देना पड़ा था लेकिन जांच की गति काफी धीमी है।
एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई अब तक 70 से अधिक मामले दर्ज कर चुकी है और 20 से अधिक प्रारंभिक विवेचना दर्ज की गई हैं। महज 17 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए जा सके हैं। दस और मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी है।
घोटाले की जांच का जिम्मा भले दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के पास है लेकिन लखनऊ सीबीआई क्षेत्रीय मुख्यालय से ही अधिकांश मामलों की जांच कराई जा रही है। दिल्ली में केवल तीन मामले हैं।
इनमें से भी दो मामले फिर लखनऊ के अधीन कर दिए गए। घोटाले में अब तक पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, विधायक आरपी जायसवाल, प्रमुख सचिव आईएएस प्रदीप शुक्ला, कई परियोजना प्रबंधक, एनआरएमएच से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का संचालन करने वाले चिकित्सक, दवा वितरक, विभिन्न कंपनियों के संचालक व आपूर्तिकर्ताओं की गिरफ्तारी की जा चुकी है।