राष्ट्रपिता महात्मा गांधी उत्तर प्रदेश सरकार की नजर में महान विभूतियों में नहीं आते। उनकी जयंती के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की जाती। जबकि महान विभूतियों की जयंतियों के आयोजनों के लिए राज्य में बजट तय किया जाता है। सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय एकीकरण अनुभाग ने जवाब में कहा है कि विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष-2012-13 में राष्ट्रीय पर्वों, कार्यक्रमों और जयंतियों के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। अंबेडकर जयंती के लिए 26.25 लाख रुपये, पटेल जयंती के लिए 3.75 लाख रुपये और महान विभूतियों का जन्मदिन मनाए जाने के लिए 26.25 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।
यह राशि जिलाधिकारियों को समानुपातिक रूप से आयोजनों पर खर्च करने के लिए दी जाती है। प्रदेश सरकार के इस विभाग ने अपने जवाब में साफ किया है कि महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजनों के लिए कोई धनराशि नहीं आवंटित की गई है। राज्य सरकार ने यह सूचना आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल की ओर से भेजी गई आरटीआई के जवाब में दी है।
अग्रवाल ने राज्य सरकार के जवाब पर गहरा आश्चर्य जताया है। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य का विषय ही है कि महान विभूतियों की जयंती के लिए धन आवंटित करते समय महात्मा गांधी के जन्मदिवस को अनदेखा किया। जबकि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अवकाश तक रहता है।
राष्ट्रीय पर्वों के लिए भी नहीं धन
प्रदेश सरकार ने यह भी कहा है कि देश के गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के लिए भी कोई धनराशि आवंटित नहीं की जाती। वैसे रिकॉर्ड के मुताबिक 2007 में गणतंत्र दिवस के मौके पर 61 जिलों को 24700 रुपये, 15 अगस्त के आयोजन के लिए 70 जिलों को 23900 रुपये का आवंटन किया गया था। 2008 में भी आवंटन किया गया और उसके बाद 2012 में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के लिए भी धन का आवंटन किया गया।