नमामि गंगे योजना के तहत इलाहाबाद में गंगा को साफ करने के लिए तकरीबन 1700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत सीवर लाइन बिछाने, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण आदि के काम हो रहे हैं।
सोमवार को यहां आईं केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती ने चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की सीवेरज योजना की घोषणा की। उमा सोमवार को ही इसका शिलान्यास भी करना चाहती थीं, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से इसके लिए तैयारी न होने के कारण वह योजना की घोषणा करके ही लौट गईं।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने इसके लिए रकम स्वीकृत कर दी है। अब प्रदेश सरकार किसी भी दिन इसका शिलान्यास कर सकती है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने नमामि गंगे योजना में इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी सहित गंगा से लगे 11 शहरों में होने वाले कार्यों के बारे में बताया। दावा किया कि गंगा दुनिया की दस सबसे साफ सुथरी नदियों में शुमार होगी। अभी यह नदी दस सबसे प्रदूषित नदी में गिनी जाती है।
400 करोड़ से अधिक की सीवरेज योजना
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती ने चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की सीवेरज योजना की घोषणा की। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे की प्रगति का जायजा लेने सोमवार को इलाहाबाद आईं थीं।
इस दौरान सरकिट हाउस में हुई बैठक में सुश्री भारती ने गंगा के लिए हो रहे काम में केंद्र सरकार की ओर अड़चन न आने का भरोसा जताया। उन्होंने 288.94 करोड़ की लागत वाली सीवरेज योजना डिस्ट्रिक्ट ए, 146.87 करोड़ की डिस्ट्रिक्ट सी तथा सलोरी में 42.30 करोड़ की लागत से सलोरी में 14 एमएलडी के एसटीपी निर्माण की घोषणा की।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक जेपी मणि ने इलाहाबाद में चल रहे और प्रस्तावित सीवरेज योजना के कामों का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन किया। बैठक में गंगा क्लीन मिशन के निदेशक टीवीएसएन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि गंगा निर्मल हो, इसके लिए जरूरी है कि उसमें गंदा पानी न जाए और गंगा में जा रहा सॉलिड वेस्ट हटाया जाए, केंद्र सरकार की यह पहली प्राथमिकता है।
सांसद केशव प्रसाद मौर्या ने शहर तथा बाहरी हिस्सों में नालों की स्थिति, सीवर बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत और कनेक्शन न देने का मामला उठाया। उन्होंने गंगा किनारे बांध बनाने का भी प्रस्ताव रखा।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत इलाहाबाद में सीवरेज, एसटीपी के काम के लिए 1190 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। इस रकम से काफी काम हो रहे हैं। कुछ काम जल्द प्रारंभ होंगे। इन कामों के लिए केंद्र सरकार 500 करोड़ रुपये और देगी।
उन्होंने कानपुर, वाराणसी सहित अन्य जिलों में नमामि गंगे योजना के तहत होने वाले कामों पर भी चर्चा की। कहा कि केंद्र ने नमामि गंगे योजना में पांच वर्ष में 20 हजार करोड़ का बजट रखा है।
कानपुर में 1000 करोड़ और वाराणसी में 2100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नमामि गंगे योजना का पहला चरण वर्ष अक्तूबर 2016 में पूरा करने तथा वर्ष 2018 तक गंगा को पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है।
बताया कि मिर्जापुर से इलाहाबाद तक गंगा में कटान रोकने के लिए काम होगा। इसकी सहायक नदियों को भी साफ सुथरा करने के साथ कटान रोकने पर काम होगा।
नालों की निगरानी सेटेलाइट से
गंगा में गिरने वाले नालों की निगरानी सेटेलाइट से होगी। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि जिन जिलों से गंगा गुजरती है, वहां बड़ी संख्या में नालों का पानी सीधे गंगा में गिर रहा है।
ऐसे 11 शहरों को चिह्नित किया गया है, जहां नालों की निगरानी सेटेलाइट से की जाएगी, ताकि गंगा में गिरने वाले गंदे पानी की सच्चाई पता चल सके। वर्ष 2018 तक इस गंदगी को गंगा में गिरने से रोकना है।
बीडीओ न होने पर जुर्माना
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने साफ किया है कि गंगा से लगे शहरों में जो भी कंपनियां एसटीपी बना रही हैं, 15 वर्ष तक वही उनकी देखरेख भी करेंगी। इसमें कंपनियों को यह भी देखना होगा कि नाले, सीवर से एसटीपी तक पहुंच रहे पानी में बीओडी की मात्रा क्या है और ट्रीटमेंट के बाद गंगा में छोड़े जा रहे पानी में बीओडी कितना है। तय मानक से अधिक बीओडी होने पर कंपनियों से जुर्माना वसूला जाएगा। यह जुर्माना एक बीओडी पर 1.20 लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूला जाएगा।
बिना जल कैसे होगी गंगा की सफाई
सरकिट हाउस में हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री के सामने महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने गंगा में जल न होने का मामला उठाया। कहा कि फाफामऊ से दारागंज तक गंगा जल बेहद कम है।
गंगा में जल नहीं होगा तो सफाई क्या होगी। इस पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने बताया कि मानसून के दौरान बारिश के पानी को रोकने और बाद में उसे गंगा में छोड़ने की योजना बनाई जा रही है। नरौरा से गंगा में तथा हथनीकुंड बैराज से यमुना में कितना पानी छोड़ा जाए यह भी तय किया जाएगा। बताया कि गंगा में कोई बांध पानी को रोकने के लिए होगा, बल्कि बांध की डिजाइन में इकोलॉजिकल फ्लो अनिवार्य होगा।
विद्युत तापघरों को गंगा से नहीं मिलेगा जल
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने सलोरी एसटीपी का भी निरीक्षण किया। यहां 14 एमएलडी का नया एसटीपी बन रहा है। इस दौरान समाजसेवी कमलेश सिंह ने गंगा जल का इस्तेमाल विद्युत तापघरों में न करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यहां इसके लिए तैयारी चल रही है। इस पर मंत्री ने गंगा क्लीन मिशन के निदेशक टीवीएसएन प्रसाद को निर्देश दिया कि गंगा का पानी विद्युत तापघरों में न इस्तेमाल करने दिया जाए। प्रयागघाट रेलवे स्टेशन के नीचे से सीवर लाइन के लिए तत्काल एनओसी भी लेने को कहा।