फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेशी वेबसाइट के जरिये भारत में क्रिकेट पर सट्टेबाजी, 2 लाख करोड़ लगे दांव पर

विज्ञापन
विज्ञापन
ये तो सबको पता है कि भारत में क्रिकेट बेटिंग कारोबार गैरकानूनी रूप से कई वर्षों से चलता आ रहा है। लेकिन ईडी के इस पर बड़े खुलासे ने सबको चौंका दिया है।
विज्ञापन


क्रिकेट आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच कर रही ईडी के अधिकारियों को पता चला है कि भारत में बैठे सटोरिए यूके की बैटिंग वेबसाइट के माध्यम से सट्टा लगावा रहे हैं।

उसके अनुसार यह कारोबार की तरह किया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, वेबसाइट पर भारतीयों के एक करोड़ खाते हैं और अब तक करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए की बेटिंग लगायी जा चुकी है।
विज्ञापन

असल राशि कई गुना ज्यादा

ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, यह तो एक वेबसाइट का आंकड़ा हैं। असल राशि कई गुना ज्यादा हो सकती है।

एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया, बेटफेयर डॉट कॉम पर मौजूद भारतीयों के हर खाते से औसतन 1.9 लाख रुपए का लेन-देन हुआ है।

उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस वेबसाइट पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया था, लेकिन फिर भी यह भारतीय यूजर्स के लिए सहज उपलब्ध है।

जानकारों के अनुसार, दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर ऐसी वेबसाइट पर बेटिंग का खेल खेला जा सकता है। इससे ईडी जैसी एजेंसियों के लिए बेटिंग पर लगाम लगाना मुश्किल होता है।
विज्ञापन

कई देशों में जायज है बेटिंग

खेलों में बेटिंग कई देशों में कानूनी रूप से जायज है जैसे यूके। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें बुकी विदेश में बैठकर कारोबार करते मिले,इसमें बेटिंग करने वाला भारतीय मुद्रा में कैश जमा कर रहा था और उसे डॉलर के रूप में विदेश भेजा रहा था।

जानकारों के अनुसार जब क्रिकेटिंग सीजन की शुरूआत होती है तब बुकिज विदेशी देश जैसे यूके, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, स्‍विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, थाईलैंड और होंगकोग चले जाते हैं और वहां से ट्रांजेक्‍शन करते हैं।

बुकीज विदेश में बैठकर एक सूपरमास्‍टर अकाउंट को क्रिएट करते है,उसमें 10 मास्टर अकाउंट्स पर कंट्रोल रहता है। एक मास्टर अकाउंट 300 सब लोगिन बना सकता है।इसी तरह भारत और पकिस्तान में बेटिंग का कारोबार चलाया जाता है।

ईडी अधिकारी ने कहा, इसी प्रकार बेटिंग में करोड़ों भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें