नये यमुना ब्रिज के नामकरण को लेकर देश की दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टी भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। इलाहाबाद के पूर्व सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी की देन बताते हुए भाजपा इस ब्रिज का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी किए जाने पर अड़ी हुई है, जबकि कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह पुल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की देन है, इसलिए उनके नाम पर इसका नामकरण किया जाए।
दोनों ही पार्टियों ने इस मसले पर नरमी दिखाने के मूड में नजर नहीं आ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेंद्र प्रसाद मिश्र ने अभी दो दिन पहले इलाहाबाद के सांसद श्यामा चरण गुप्त को पत्र लिखकर नये नैनी पुल के दोनों तरफ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सेतु लिखवाने की मांग की है।
उनके मुताबिक पूर्व की एनडीए गर्वनमेंट के कार्यकाल में इस पुल के निर्माणकार्य के दौरान ही इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सेतु रखा जाना तय हुआ था। रविवार तीन जून 2001 को इलाहाबाद के सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने यूपी के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में पुल का शिलान्यास किया। तब इस पुल के दोनों ओर शिलान्यास के पत्थर भी लगाए गए थे।
भाजपा ने सौंपी शिलान्यास पत्थर की फोटो
पूर्व जिलाध्यक्ष ने उक्त निमंत्रण पत्र की प्रति और शिलान्यास पत्थर की फोटो भी सांसद श्यामा चरण को सौंपी है। पूर्व जिलाध्यक्ष के मुताबिक इस पुल का कार्य 2004 में पूर्ण हुआ था, तब तक भाजपा की सरकार चल रही थी।
जब यूपीए सरकार बनी तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पुल का नाम राजीव गांधी सेतु कर उसका उद्घाटन करने का निर्णय लिया लेकिन बीजेपी द्वारा विरोध किये जाने पर यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया। इस मामले में शुक्रवार को भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को भी एक पत्र देकर पुल के दोनों तरफ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सेतु लिखाए जाने की मांग की है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम की मुखालफत की है। पार्टी की राज्य कार्य समिति के सदस्य एवं प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय ने भाजपा द्वारा पुल के नामकरण को लेकर किए गए दावों को निराधार बताया है। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन, जहाजरानी एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा है।
कांग्रेसी नेता के मुताबिक 1984-85 के लोकसभा चुनाव के दौरान केपी कालेज में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी अमिताभ बच्चन ने नये नैनी पुल के निर्माण की मांग की थी। पुल का बजट आवंटन भी कांग्रेस सरकार ने ही पास किया।
'...इसलिए पुल का नाम राजीव गांधी सेतु रखा जाए'
उन्होंने कहा कि 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने इसका शिलान्यास किया। बाद में 1991 से 1996 के मध्य कांग्रेस की केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर शिलान्यास की बात चली, इसलिए पुल का नाम राजीव गांधी सेतु रखा जाए। वार्ष्णेय का दावा है कि पुल से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम एवं योगदान का दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है।
‘भाजपा के अथक प्रयास के बाद पूर्व की एनडीए सरकार में ही पुल का शिलान्यास हुआ। इसका नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर ही होना चाहिए। इस बारे में संबंधित मंत्रालय से बातचीत की जाएगी।’
-केशव प्रसाद मौर्य (भाजपा सांसद, फूलपुर)
‘राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान अमिताभ बच्चन के सांसद रहते हुए पुल की रूपरेखा तैयार हुई थी। पुल का नामकरण इलाहाबाद से जुड़ी किसी हस्ती के नाम होना चाहिए।’
-प्रमोद तिवारी (सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता)