पिछले हफ्ते महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के खोजी पत्रकार तरुण तेजपाल की गिरफ्तारी के बाद इस पर बहस छिड़ गई है कि महिला पत्रकार कितनी सुरक्षित हैं? हालांकि ताजा सर्वे से निराशा ही हाथ लगती है।
इस सर्वे के मुताबिक अभी भी करीब दो-तिहाई महिला मीडियाकर्मियों को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। जबकि भारत सहित कई देशों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून हैं।
यह सर्वे वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल वूमेंस मीडिया फाउंडेशन और लंदन की इंटरनेशनल न्यूज सेफ्टी इंस्टीट्यूट ने मिलकर किया है।
सर्वे में 64 फीसदी महिलाओं ने बताया कि काम के दौरान उन्हें गाली अथवा यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। वहीं 22.5 फीसदी पत्रकारों का कहना था कि उनके सीनियर अपने पद और ताकत का दुरुपयोग करते हैं।
21 फीसदी महिला पत्रकारों ने कहा कि उन्हें कभी न कभी मौखिक, लिखित अथवा शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। अधिकतर मामलों में उत्पीड़न बॉस अथवा वरिष्ठ सहकर्मी ने किए।
46 फीसदी महिला मीडियाकर्मियों ने माना कि उन्हें यौन शोषण से रूबरू होना पड़ा है। अधिकतर घटनाएं ऑफिस जैसे आम जगहों पर हुईं। इस दौरान सहकर्मियों ने ड्रेस को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी और गंदे मजाक किए।